हजारों किसानों ने विभिन्न मांगों को लेकर किया आंदोलन; धान बोनस तत्काल देने की विधायक रामदास मसराम की मांग
गढचिरौली ब्यूरो : आरमोरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामदास मसराम के नेतृत्व में देसाईगंज में किसानों का विशाल आंदोलन किया गया। विधानसभा क्षेत्र के पांचों तालुकों से बड़ी संख्या में किसान, महिलाएं, मजदूर, दलित, ओबीसी और आदिवासी समाज के नागरिक इस आंदोलन में शामिल हुए। हजारों किसान ट्रैक्टरों के साथ आंदोलन स्थल पर पहुंचे और सरकार के समक्ष अपनी विभिन्न मांगें एवं समस्याएं रखीं।
विधायक रामदास मसराम ने कहा कि यह केवल कांग्रेस का आंदोलन नहीं है, बल्कि आम किसानों, मेहनतकशों, दलितों, ओबीसी, आदिवासियों और विभिन्न वर्गों की समस्याओं को लेकर किया गया आंदोलन है। सरकार की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन समस्याओं का आकलन कर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए यह आंदोलन किया गया।
कर्जमाफी और बोनस अलग-अलग मुद्दे
मसराम ने कहा कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा में किसानों को बोनस देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक बोनस का कोई पता नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्जमाफी और बोनस दो अलग-अलग मुद्दे हैं। कर्जमाफी होने के कारण किसानों को बोनस नहीं दिया जा सकता, ऐसा कहना उचित नहीं है। सरकार को किसानों से किए गए वादे के अनुसार तत्काल बोनस देना चाहिए।
आंदोलन में कर्जमाफी, धान बोनस, स्मार्ट मीटर, संजय गांधी निराधार योजना, घरकुल, प्रॉपर्टी कार्ड, विद्यार्थियों के लिए छात्रावास सहित अनेक मांगों को उठाया गया। मसराम ने कहा कि इन समस्याओं को लेकर हजारों किसान और महिलाएं आंदोलन में शामिल हुईं और ट्रैक्टरों के साथ अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाई।
स्थानीय समस्याओं के समाधान के निर्देश
मसराम ने बताया कि आंदोलन के बाद प्रशासन को दिए गए ज्ञापन में कई ऐसी समस्याएं भी शामिल थीं, जिनका समाधान स्थानीय स्तर पर किया जा सकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से एसडीएस और तहसीलदार स्तर की समस्याओं का तत्काल निवारण करने तथा इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
उन्होंने कहा कि प्रॉपर्टी कार्ड, विद्यार्थियों के छात्रावास और तहसील स्तर से संबंधित मामलों की समीक्षा कर स्थानीय समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों ने भी इन समस्याओं पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
खाद और कृषि दवाओं की बढ़ती कीमतों पर भी सवाल
विधायक ने किसानों के लिए आवश्यक रासायनिक खाद और कृषि दवाओं की बढ़ती कीमतों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष डीएपी खाद की कीमत करीब 1,400 रुपये थी, जबकि अब यह 2,200 से 2,500 रुपये तक पहुंच गई है। इससे किसानों की उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है और उनकी आय पर असर पड़ रहा है।
उन्होंने कोरची तालुका के कोटगुल का उदाहरण देते हुए बताया कि किसानों ने यूरिया खाद ब्लैक में 1,500 रुपये तक बेचे जाने की शिकायत की थी। शिकायत मिलने के बाद उन्होंने तत्काल संबंधित कंट्रोल अधिकारी से संपर्क कर मामले की जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
मसराम ने कहा कि किसानों को लूटने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। साथ ही सरकार को खाद, रासायनिक दवाइयों और खेती में इस्तेमाल होने वाली अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए धान बोनस तत्काल जारी किया जाए और खेती की बढ़ती लागत को कम करने के लिए प्रभावी उपाय किए जाएं।
ब्युरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज..