जरांगे का सरकार पर जोरदार हमला

मराठा आरक्षण पर सरकार को घेरा; 12 सितंबर के बाद मुंबई आंदोलन की चेतावनी

जालना : मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अंतरवाली सराटी में आमरण अनशन कर रहे मनोज जरांगे पाटील ने आज आयोजित पत्रकार परिषद में राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। जरांगे ने मंत्री उदय सामंत, प्रताप सरनाईक, शंभूराज देसाई और एकनाथ शिंदे के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर मराठा समाज की मांगों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि आरक्षण देने के बजाय आंदोलन को कमजोर करने और मराठा समाज में फूट डालने का प्रयास किया जा रहा है।

जरांगे ने रद्द किए गए मराठा प्रमाणपत्रों को दोबारा वैध करने का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने सवाल किया कि सरकार की ओर से पहले जो आश्वासन दिए गए थे, उनका क्या हुआ? जरांगे के मुताबिक, पिछले करीब दो महीने से रद्द किए गए प्रमाणपत्रों को फिर से वैध करने की मांग की जा रही है, लेकिन इस पर अभी तक स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने मंत्री उदय सामंत से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।

शंभूराज देसाई पर भी निशाना

पत्रकार परिषद में जरांगे ने मंत्री शंभूराज देसाई पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देसाई मराठा समाज की मांगों के पक्ष में खड़े होने के बजाय सरकार का बचाव कर रहे हैं। जरांगे ने कहा कि मराठा समाज को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अपनी मांगों पर ठोस निर्णय चाहिए। उन्होंने एकनाथ शिंदे से भी रद्द किए गए मराठा प्रमाणपत्रों को दोबारा वैध करने की मांग की।

‘संयम’ की अपील पर जरांगे का पलटवार

मंत्री उदय सामंत की ओर से आंदोलन के दौरान संयम बरतने की अपील पर भी जरांगे ने आक्रामक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि संभाजीनगर में बैठक आयोजित कर आंदोलन के खिलाफ रणनीति बनाने और उसे कमजोर करने का प्रयास किया गया। जरांगे ने सरकार पर आंदोलन को लेकर राजनीतिक रणनीति अपनाने का आरोप लगाया।

हालांकि, जरांगे ने यह भी कहा कि सरकार के साथ बातचीत के दरवाजे अभी खुले हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में मराठा समाज की मांगों का समाधान करना चाहती है तो उसे पहल करनी चाहिए और बातचीत के जरिए रास्ता निकालना चाहिए। उन्होंने सरकार से टकराव के बजाय मांगों पर ठोस निर्णय लेने की अपील की।

12 सितंबर की डेडलाइन, मुंबई आंदोलन की चेतावनी

मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर जरांगे ने सरकार के सामने 12 सितंबर की समयसीमा रखी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 12 सितंबर तक मराठा आरक्षण के मुद्दे पर समाधान नहीं निकाला गया, तो मुंबई में आंदोलन का रास्ता खुल जाएगा। उन्होंने कहा कि 12 सितंबर को आगे के आंदोलन की दिशा तय की जाएगी और सरकार को इससे पहले मराठा समाज की मांगों पर निर्णय लेना चाहिए।

जरांगे की इस चेतावनी के बाद मराठा आरक्षण आंदोलन एक बार फिर राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गया है। सरकार की ओर से इस पर क्या भूमिका अपनाई जाती है और 12 सितंबर से पहले कोई ठोस निर्णय लिया जाता है या नहीं, इस पर अब सभी की नजरें हैं।

प्रताप सरनाईक के बयान पर भी जवाब

मंत्री प्रताप सरनाईक के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जरांगे ने कहा कि यदि उनके साथ रट्टे की भाषा में बात की जाएगी, तो उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा। उनके इस बयान से साफ है कि आंदोलन को लेकर सरकार और जरांगे के बीच बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।

महाविकास आघाड़ी से बातचीत पर भी सवाल

जरांगे ने महाविकास आघाड़ी से बातचीत को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने राजनीतिक दलों की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि मराठा आरक्षण का मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। समाज की मांगों पर स्पष्ट और ठोस निर्णय होना जरूरी है।

फिलहाल अंतरवाली सराटी में जरांगे का आमरण अनशन जारी है और 12 सितंबर की समयसीमा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार की ओर से इस मुद्दे पर क्या कदम उठाया जाता है और जरांगे आंदोलन को किस दिशा में ले जाते हैं, इस पर राज्यभर की नजर बनी हुई है।

ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज..

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