गडचिरोली : जिले के चामोर्शी–आष्टी राष्ट्रीय राजमार्ग NH 353C एक बार फिर सुर्खियों में है। कोनसरी (Konsari) गांव के पास स्थापित स्टील प्लांट के सामने किए गए सौंदर्यीकरण और Protection wall निर्माण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग, गडचिरोली ने इस कार्य को नियमों के विरुद्ध मानते हुए 15 मई 2025 में कंपनी को लिखित नोटिस जारी कर Barricading और Protection wall अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, संबंधित कंपनी द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग के 24 मीटर के राइट ऑफ वे (ROW) के भीतर Barricading और Protection wall सौंदर्यीकरण का कार्य किया गया है। नियमानुसार इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण या अवरोध खड़ा करना पूर्णतः प्रतिबंधित है, क्योंकि इससे यातायात प्रभावित होता है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। इसके बावजूद मौके पर और उससे सटे बगीचे जैसी संरचनाएं मौजूद हैं, जो सीधे तौर पर सड़क की चौड़ाई और दृश्यता को प्रभावित कर रही हैं।
स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों का कहना है कि इस स्थान पर भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान काफी दिक्कतें आती हैं। सड़क संकरी महसूस होती है और कई बार Overtaking के दौरान दुर्घटना की आशंका बन जाती है। विशेष रूप से तब स्थिति और गंभीर हो जाती है जब प्लांट परिसर में कोई बड़ा कार्यक्रम या आयोजन होता है। उस समय हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं और आम जनता को घंटों जाम में फंसना पड़ता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नेशनल हाईवे विभाग ने 15 मई 2025 में स्पष्ट रूप से नोटिस जारी कर दिया था, तो अब तक उस पर अमल क्यों नहीं हुआ? विभागीय सूत्रों के मुताबिक, कंपनी ने अब तक नोटिस का कोई औपचारिक जवाब भी नहीं दिया है। ऐसे में यह मुद्दा और गंभीर हो जाता है कि आखिर विभाग आगे की कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी प्रकार का अतिक्रमण कोई आम नागरिक करता, तो तत्काल कार्रवाई कर दी जाती। लेकिन जब मामला एक बड़ी औद्योगिक कंपनी से जुड़ा है, तो विभाग की चुप्पी कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रही है। क्या यह महज लापरवाही है या फिर किसी स्तर पर मिलीभगत? यह सवाल अब खुले तौर पर उठने लगे हैं।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह जनसुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, ROW क्षेत्र को पूरी तरह अवरोध मुक्त रखना अनिवार्य है, ताकि यातायात सुचारू और सुरक्षित बना रहे।
हालांकि, यह भी उल्लेखनीय है कि संबंधित कंपनी जिले में औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। लेकिन विकास के साथ नियमों का पालन करना भी उतना ही जरूरी है। सरकारी भूमि और राष्ट्रीय राजमार्ग के दायरे में इस प्रकार का निर्माण किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
अब निगाहें नेशनल हाईवे विभाग, जिला प्रशासन और राज्य सरकार की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या विभाग अपने ही आदेशों को लागू कर पाएगा या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा? यह आने वाला समय ही तय करेगा, लेकिन फिलहाल यह मुद्दा गडचिरोली में प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के समान पालन की बड़ी परीक्षा बन गया है।
ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज़…