नागपुर में डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति द्वारा एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें अयोध्या में भगवान श्रीराम जन्मभूमि पर बने भव्य मंदिर के निर्माण में योगदान देने वाली प्रमुख विभूतियों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, पूज्य गोविंददेव गिरी महाराज तथा समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण कर की गई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि श्रीराम मंदिर का निर्माण केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि 500 वर्षों के संघर्ष और करोड़ों लोगों की आस्था का परिणाम है। 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ पूरे देश ने एक ऐतिहासिक क्षण का अनुभव किया।
अपने संबोधन में डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि मंदिर निर्माण समाज के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे गोवर्धन पर्वत भगवान श्रीकृष्ण की उंगली पर उठा, लेकिन उसमें सभी लोगों का योगदान था, वैसे ही राम मंदिर भी पूरे समाज के सहयोग से बना है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का उत्थान और सनातन धर्म का पुनर्जागरण एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है।
समिति के अध्यक्ष भैयाजी जोशी ने कहा कि राम मंदिर केवल एक स्थापत्य नहीं, बल्कि हिंदू समाज के आत्मसम्मान और पुनर्स्थापना का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यह संघर्ष सैकड़ों वर्षों तक चला और देशभर के लाखों गांवों से लोगों ने इसमें भागीदारी निभाई।
राम मंदिर निर्माण समिति से जुड़े चंपत राय ने निर्माण से जुड़े कई रोचक पहलुओं को साझा करते हुए बताया कि मंदिर को 1000 वर्षों तक टिकाऊ बनाने के लिए बिना लोहे और न्यूनतम सीमेंट के विशेष तकनीकों का उपयोग किया गया। देशभर के हजारों कारीगरों और विशेषज्ञों ने इसमें योगदान दिया, जिससे यह राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया।

इस समारोह में मंदिर निर्माण से जुड़े 30 प्रमुख व्यक्तियों का शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम के अंत में पूज्य गोविंददेव गिरी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि राम मंदिर निर्माण एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन रामराज्य की स्थापना अभी शेष है, जिसके लिए समाज को निरंतर प्रयास करना होगा।
ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज़…