थाने से महज 3 कि.मी. दूर 4 साल तक चलता रहा कथित जुआ अड्डा, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
कोरची तहसील के कोटगुल इलाके के नांगपूर जंगल में कथित तौर पर चल रहे जुआ क्लब को लेकर अब कई गंभीर और चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस क्लब में सिर्फ लाखों-करोड़ों रुपये का जुआ ही नहीं खेला जाता था, बल्कि शराब और लड़कियों की मौजूदगी में देर रात तक मौज-मस्ती का माहौल भी रहता था। आरोप है कि जुआ खेलने के लिए आने वाले लोगों को शराब उपलब्ध कराई जाती थी और कुछ ग्राहकों के मनोरंजन के लिए लड़कियों को भी बुलाया जाता था।
बताया जा रहा है कि यह कथित क्लब रात करीब 11 बजे से सुबह 4 बजे तक चलता था। शराब और नशे के माहौल में बड़ी रकम दांव पर लगाई जाती थी। सूत्रों का दावा है कि क्लब में आने वाले लोगों की पहचान रखने के साथ-साथ बाहरी या अनजान व्यक्ति को अंदर आने से रोकने के लिए कथित तौर पर हथियारबंद लोगों की मौजूदगी रहती थी।
सबसे गंभीर दावा यह है कि क्लब की सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ से कथित तौर पर पिस्टल रखने वाले शूटरों को बुलाया गया था। आरोप है कि क्लब के संचालन का विरोध करने या इसकी शिकायत करने की कोशिश करने वालों को धमकाया जाता था। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना और पुलिस जांच में इनकी सच्चाई सामने आना जरूरी है।
थाने से सिर्फ 3 किलोमीटर दूर, फिर भी पुलिस को भनक नहीं?
सबसे बड़ा सवाल यही की कोटगूल पुलिस थाने से महज करीब 3 कि.मी. की दूरी पर कथित तौर पर चल रहा वह जुआ अड्डा आखिर पुलिस की नजरों से कैसे बचा रहा? स्थानीय स्तर पर इस अड्डे को लेकर कई वर्षों से चर्चा होने की बात सामने आ रही है। अगर यह जानकारी सही है तो सवाल उठता है कि कार्रवाई में करीब चार साल की कथित देरी क्यों हुई?
हाल में पुलिस की छापेमारी के बाद कथित मुख्य आरोपियों परमेश्वर लोहंबरे और मिथुन तांबेकर के मौके से फरार होने की बात सामने आ रही है। अब जांच का विषय यह है कि क्लब के संचालन में दोनों की वास्तविक भूमिका क्या थी और छापेमारी के समय वे मौके पर क्यों नहीं मिले।
कथित क्लब में देखरेख करने वाले लोगों को नियमित रूप से आने वाले जुआरियों की पहचान रहती थी। आरोप है कि कोई नया व्यक्ति दिखाई देने पर उसे कथित तौर पर बंदूक दिखाकर डराया जाता था और वापस भेज दिया जाता था। विरोध करने वालों को जान से मारने की धमकी दिए जाने के दावे भी सामने आ रहे हैं।
अब पुलिस के सामने सिर्फ जुआ खेलने वालों पर कार्रवाई की चुनौती नहीं है, बल्कि कथित जुआ क्लब के संचालनकर्ता, हथियारबंद लोगों की मौजूदगी, शराब और लड़कियों की व्यवस्था तथा इतने लंबे समय तक अड्डा चलने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई—इन सभी सवालों की जांच करना भी जरूरी है।
इन आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। लेकिन अगर ये दावे सही साबित होते हैं, तो थाने से महज 3 कि.मी. की दूरी पर वर्षों तक कथित तौर पर चल रहे इस पूरे नेटवर्क ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज़…