इंद्रावती में आधी रात ‘सागौन तस्करी’ का खेल! वन विभाग ने बिछाया जाल, 27 नग लकड़ी बरामद

गढ़चिरौली ब्युरो : महाराष्ट्र–छत्तीसगढ़ सीमा पर इंद्रावती नदी के रास्ते सागौन तस्करी की बड़ी कोशिश को सिरोंचा वन विभाग ने आधी रात की कार्रवाई में नाकाम कर दिया। तस्कर नदी के रास्ते सागौन की लकड़ी छत्तीसगढ़ ले जाने की तैयारी में थे, लेकिन वन विभाग की सतर्क निगरानी के चलते उन्हें अपना माल नदीपात्र में ही छोड़कर भागना पड़ा।

28 अगस्त की रात करीब 9 बजे असरअल्ली वन परिक्षेत्राधिकारी शिवाजी अजिनाथ पानगे को गुप्त सूचना मिली थी कि आसपास के गांवों से सागौन की लकड़ियां इंद्रावती नदी में डालकर छत्तीसगढ़ की ओर भेजी जाने वाली हैं। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने बोनतामाडगू कैंप के आसपास मोर्चा संभाल लिया। नदी का पात्र करीब 300 से 400 मीटर चौड़ा होने के कारण तस्करों को किसी भी दिशा से भागने का मौका न मिले, इसके लिए वनकर्मियों ने नदी के दोनों किनारों पर घेराबंदी कर दी।

रात 1 बजे शुरू हुआ ऑपरेशन

रात करीब 1 बजे नदीपात्र में संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं। वन विभाग की टीम ने जैसे ही कार्रवाई शुरू की, तस्करों को इसकी भनक लग गई। अंधेरे और इंद्रावती नदी के तेज बहाव का फायदा उठाकर तस्कर मौके से फरार हो गए। लेकिन वे अपने साथ सागौन की लकड़ी नहीं ले जा सके। वन विभाग की टीम ने नदीपात्र की तलाशी ली तो वहां से 27 सागौन के नग बरामद हुए। जब्त लकड़ी की मात्रा करीब 2 घ.मी. बताई गई है।

तस्करों की तलाश तेज

कार्रवाई के बाद वन विभाग ने फरार तस्करों की तलाश शुरू कर दी है। आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत वन अपराध दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इंद्रावती नदी के रास्ते सागौन तस्करी रोकने के लिए सीमावर्ती क्षेत्र में वन विभाग की गश्त और निगरानी और अधिक बढ़ा दी गई है।

यह कार्रवाई उपवनसंरक्षक नवकिशोर रेड्डी और उपविभागीय वनाधिकारी अक्षय मीना के मार्गदर्शन में असरअल्ली वन परिक्षेत्राधिकारी शिवाजी अजिनाथ पानगे, वनरक्षकों, वन सुरक्षा मजदूरों और बोनतामाडगू कैंप की टीम ने की।

वन विभाग की इस कार्रवाई से इंद्रावती नदी के रास्ते चल रहे सागौन तस्करी के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।

ब्युरो रिपोर्ट सिंदूर न्युज..

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