6 कि.मी. पैदल चलने की मजबूरी बनी मां-बेटी की मौत की वजह

  एटापल्ली तहसील के अलदंडी गांव की घटना ने गढ़चिरौली के विकास दावों की खोली पोल

गढ़चिरौली जिले के एटापल्ली तहसील अंतर्गत अलदंडी गांव में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं और सड़क के अभाव ने एक गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ बच्चे की जान ले ली। 9 माह की गर्भवती आशा संतोष किरंगा (उम्र 24 वर्ष) को इलाज के लिए मजबूरी में करीब 6 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। इस दौरान हालत बिगड़ने से आशा और उसके गर्भ में पल रही बच्ची की मौत हो गई। यह दर्दनाक घटना 2 जनवरी 2026 को सामने आई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अलदंडी गांव मुख्य सड़क से कटा हुआ है। गांव में न तो पक्की सड़क है और न ही प्रसव जैसी आपात स्थिति के लिए कोई स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध है। 1 जनवरी को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर आशा किरंगा अपने पति के साथ जंगल के रास्ते पैदल चलकर पेटा स्थित बहन के घर जाने के लिए निकली, ताकि वहां से इलाज की व्यवस्था हो सके। लेकिन गर्भावस्था की अंतिम अवस्था में किया गया यह पैदल सफर उसके लिए जानलेवा साबित हुआ।

2 जनवरी की सुबह हालत गंभीर होने पर एंबुलेंस की मदद से उसे हेडरी स्थित कालीअम्माल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने सिजेरियन ऑपरेशन का निर्णय लिया। हालांकि तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गर्भ में ही बच्ची की मौत हो चुकी थी और अत्यधिक रक्तस्राव व जटिलताओं के चलते कुछ समय बाद आशा किरंगा ने भी दम तोड़ दिया।

घटना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था की संवेदनहीनता भी सामने आई। पोस्टमार्टम के लिए शवों को एटापल्ली ग्रामीण अस्पताल भेजा गया, लेकिन वहां स्त्री रोग विशेषज्ञ उपलब्ध न होने का हवाला देकर शवों को करीब 40 किलोमीटर दूर अहेरी रेफर कर दिया गया। जीवन में सड़क और इलाज के लिए जूझने वाली महिला को मौत के बाद भी व्यवस्थाओं की मार झेलनी पड़ी।

उल्लेखनीय है कि गढ़चिरौली जिले के पालक मंत्री स्वयं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हैं। वे अपने दौरों के दौरान बार-बार यह दावा करते रहे हैं कि गढ़चिरौली अब पिछड़ा जिला नहीं रहा, यह महाराष्ट्र का प्रवेश द्वार बन चुका है, स्टील सिटी के रूप में विकसित हो रहा है, उद्योग आ रहे हैं और रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। लेकिन अलदंडी जैसी घटनाएं इन दावों की जमीनी हकीकत को उजागर करती हैं।

दूर-दराज और आदिवासी इलाकों में आज भी सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है। इन्हीं कमियों के कारण लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है और कई बार इसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है।

इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश है। लोगों ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और दूरस्थ गांवों में तत्काल सड़क व स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि भविष्य में किसी और मां को इस तरह जान न गंवानी पड़े।

ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज़..

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