जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा के आदेश से गड़चिरौली में चार दत्तक मामलों का निस्तारण
गड़चिरौली, ब्युरो : गड़चिरौली जिले में रिश्तेदारी के तहत दत्तक प्रक्रिया से जुड़े चार मामलों को कानूनी मान्यता प्रदान की गई है। जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा के आदेशानुसार इन चारों मामलों की आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी जांच पूरी करने के बाद दत्तक आदेश जारी किए गए हैं। इस प्रक्रिया के बाद संबंधित चारों बच्चों को उनके रिश्तेदारों के पास कानूनी अभिभावकत्व प्राप्त हुआ है।
बाल न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 और संशोधित अधिनियम, 2021 के प्रावधानों के अनुसार यह कार्रवाई की गई। महिला एवं बाल विकास विभाग के दिशा-निर्देशों तथा मुंबई हाईकोर्ट की रिट याचिका क्रमांक 1085/2023 में 4 मई 2026 को दिए गए आदेश के अनुरूप इन मामलों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
दस्तावेजों और कानूनी मानकों की हुई जांच
जिला बाल संरक्षण इकाई के पास प्राप्त इन चार मामलों की विस्तृत जांच की गई। दत्तक प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक दस्तावेज, कानूनी कागजात, पारिवारिक संबंधों से जुड़े प्रमाण तथा निर्धारित शर्तों एवं मानकों की पड़ताल की गई। जांच के दौरान सभी आवश्यक मानदंड पूरे पाए जाने के बाद चारों मामलों में कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई और संबंधित बच्चों के दत्तक संबंधों को मान्यता दी गई।
बच्चों को मिलेगा सुरक्षित पारिवारिक वातावरण
दत्तक आदेश जारी होने के बाद इन बच्चों को उनके रिश्तेदारों के पास कानूनी अभिभावकत्व प्राप्त हुआ है। इससे बच्चों के पालन-पोषण और संरक्षण को कानूनी आधार मिला है। साथ ही बच्चों को स्थिर, सुरक्षित और पारिवारिक वातावरण में बढ़ने का अवसर मिलेगा। दत्तक प्रक्रिया को कानूनी मान्यता मिलने से भविष्य में बच्चों के अधिकारों और हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।
जिला प्रशासन की देखरेख में पूरी हुई प्रक्रिया
यह पूरी कार्रवाई जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा के मार्गदर्शन में की गई। मामलों की आवश्यक जांच, दस्तावेजों की पड़ताल और प्रशासनिक प्रक्रिया जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी दीपक बनाईत, जिला बाल संरक्षण अधिकारी अविनाश गुरनुले और बाल संरक्षण अधिकारी प्रियंका आसूटकर द्वारा पूरी की गई।
जिला प्रशासन के अनुसार, दत्तक प्रक्रिया का उद्देश्य बच्चों के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए उन्हें सुरक्षित पारिवारिक वातावरण और आवश्यक कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराना है। इन चार मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब बच्चों के दत्तक संबंधों को विधिवत कानूनी आधार प्राप्त हो गया है।
ब्युरो रिपोर्ट सिंदूर न्युज..