गेवर्धा के कथित तस्करी अड्डे पर 30 साल से सवाल, कार्रवाई सिर्फ ट्रक-पिकअप चालकों तक क्यों? | 19 गोवंश बरामद, 19.65 लाख का माल जब्त
गडचिरोली ब्युरो : कुरखेड़ा थाना क्षेत्र में गोवंश तस्करी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल जमील कुरैशी को लेकर खड़ा हो गया है। 24 अगस्त की रात स्थानीय अपराध शाखा और कुरखेड़ा पुलिस ने गेवर्धा-केशोरी मार्ग पर कार्रवाई करते हुए दो वाहनों से 19 गोवंशीय पशु बरामद किए और 19 लाख 65 हजार रुपये का माल जब्त किया। पुलिस ने दो वाहन चालकों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस कथित तस्करी नेटवर्क के मास्टरमाइंड के रूप में जिस जमील कुरैशी का नाम लिया जा रहा है, वह अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों है, यह सवाल चर्चा में है।
स्थानीय आरोपों के मुताबिक कुरखेड़ा मुख्यालय से महज करीब 4 कि.मी. दूर गेवर्धा स्थित पीसीसी कंस्ट्रक्शन डांबर प्लांट के पीछे लंबे समय से गोवंश तस्करी का कथित अड्डा सक्रिय है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस स्थान का इस्तेमाल करीब 30 वर्षों से गोवंश को इकट्ठा करने और रात के अंधेरे में वाहनों के माध्यम से बाहर भेजने के लिए किया जाता रहा है। इन आरोपों में जमील कुरैशी का नाम कथित रूप से प्रमुखता से लिया जा रहा है।
अगर स्थानीय लोगों द्वारा किए जा रहे ये दावे सही हैं, तो सवाल और भी गंभीर है—तीन दशक से एक ही स्थान पर कथित रूप से गोवंश तस्करी का अड्डा चल रहा है, तो पुलिस प्रशासन इस अड्डे को आज तक पूरी तरह खत्म क्यों नहीं कर पाया?
जमील कुरैशी का नाम बार-बार सामने, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?
कुरखेड़ा में ताजा कार्रवाई के बाद यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि जमील कुरैशी का नाम स्थानीय स्तर पर कथित गोवंश तस्करी नेटवर्क से जोड़ा जाता रहा है। इससे पहले भी कुरखेड़ा के गोठन गांव नाके पर गोवंश से भरे ट्रक पकड़े गए थे। इसके बावजूद कथित नेटवर्क पूरी तरह बंद नहीं हुआ और अब फिर गेवर्धा-केशोरी मार्ग पर गोवंश से भरे वाहन पकड़े गए हैं।
सवाल यह है कि अगर वाहन बार-बार पकड़े जा रहे हैं तो उन वाहनों को भरने, पशु उपलब्ध कराने, परिवहन की व्यवस्था करने और उन्हें आगे भेजने वाले कथित नेटवर्क तक पुलिस क्यों नहीं पहुंच रही?
क्या हर बार केवल चालक को पकड़ना ही पर्याप्त है? कथित मास्टरमाइंड जमील कुरैशी तक जांच क्यों नहीं पहुंचती? अगर जांच में जमील कुरैशी की कोई भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? और अगर उसके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप गलत हैं, तो पुलिस जांच के जरिए स्थिति साफ क्यों नहीं करती?
24 अगस्त की कार्रवाई ने फिर खोली तस्करी नेटवर्क की परत
24 अगस्त की रात स्थानीय अपराध शाखा को सूचना मिली थी कि गेवर्धा से केशोरी मार्ग के रास्ते दो वाहनों में गोवंश को अवैध रूप से ले जाया जा रहा है। सूचना के आधार पर एलसीबी और कुरखेड़ा पुलिस ने गेवर्धा गांव के पास जाल बिछाया।
कुछ समय बाद ट्रक क्रमांक TG-12-U-4896 और महिंद्रा बोलेरो पिकअप क्रमांक MH-35-AJ-4601 आते दिखाई दिए। पुलिस ने दोनों वाहनों को रोककर तलाशी ली तो गोवंशीय पशुओं को बेहद निर्दयता से ठूंसकर भरा हुआ पाया गया। परिवहन से संबंधित कोई वैध अनुमति भी नहीं मिली।
ट्रक में 11 गाय और 2 बैल, कुल 13 गोवंशीय पशु मिले। इनकी कीमत करीब 1 लाख 85 हजार रुपये बताई गई है। ट्रक चालक की पहचान शेख इब्राहिम शेख इस्माइल, उम्र 40 वर्ष, निवासी मेहबूब नगर, पीली नदी, उप्पलवाड़ी, नागपुर के रूप में हुई।
दूसरे वाहन, MH-35-AJ-4601 महिंद्रा बोलेरो पिकअप, में 4 गाय और 2 बैल, कुल 6 गोवंश मिले। इनकी कीमत करीब 80 हजार रुपये बताई गई है। इस वाहन के चालक की पहचान मुफस्सिल कुरैशी मोहम्मद जमील कुरैशी, उम्र 25 वर्ष, निवासी चिराग अली चौक, टेका नई बस्ती, नागपुर के रूप में हुई।
दोनों वाहनों से बरामद 19 गोवंश की कुल कीमत 2 लाख 65 हजार रुपये है। इसके अलावा करीब 12 लाख रुपये कीमत का ट्रक और 5 लाख रुपये कीमत की बोलेरो पिकअप जब्त की गई। इस तरह पुलिस ने कुल 19 लाख 65 हजार रुपये का माल जब्त किया।
एक ही नाम, एक ही इलाका और बार-बार सामने आती तस्करी की तस्वीर?
स्थानीय आरोपों के मुताबिक गेवर्धा के जिस कथित अड्डे की चर्चा हो रही है, वहां से रात के समय ट्रक और पिकअप वाहनों के जरिए गोवंश को बाहर भेजे जाने की गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं। इन्हीं आरोपों में जमील कुरैशी का नाम कथित रूप से सामने आता है।
हालांकि, पुलिस की मौजूदा कार्रवाई में जमील कुरैशी को मास्टरमाइंड घोषित नहीं किया गया है, इसलिए उसकी कथित भूमिका की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। लेकिन यही तो जांच का सबसे बड़ा सवाल है—अगर किसी व्यक्ति का नाम लगातार स्थानीय आरोपों में सामने आता है, तो पुलिस को उसकी भूमिका की जांच करने में क्या परेशानी है?
गोवंश कहां से आते हैं? किसके माध्यम से खरीदे जाते हैं? गेवर्धा में उन्हें कौन इकट्ठा करता है? वाहनों की व्यवस्था कौन करता है? नागपुर तक परिवहन कौन करवाता है? पशुओं का अंतिम खरीदार कौन है? और इस पूरे कारोबार में पैसा किसके माध्यम से घूमता है?
इन सवालों के जवाब मिले बिना केवल ट्रक और पिकअप पकड़ने से क्या गोवंश तस्करी का नेटवर्क खत्म हो सकता है?
‘दिखावे की कार्रवाई’ या नेटवर्क की जड़ पर प्रहार?
पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने का मकसद कार्रवाई को कमतर आंकना नहीं है। 19 गोवंश की बरामदगी और 19.65 लाख रुपये की जब्ती निश्चित रूप से महत्वपूर्ण कार्रवाई है। लेकिन यदि इसी क्षेत्र से पहले भी वाहन पकड़े गए हैं और फिर वही गतिविधियां दोबारा सामने आ रही हैं, तो यह जानना जरूरी है कि पिछली कार्रवाइयों के बाद कथित नेटवर्क दोबारा कैसे सक्रिय हुआ।
स्थानीय लोगों का सीधा सवाल है—अगर पुलिस प्रशासन को अवैध गोवंश तस्करी पर वास्तव में लगाम लगानी है, तो कार्रवाई के बाद वही कारोबार फिर शुरू क्यों होता है?
और सबसे अहम सवाल—गेवर्धा के कथित तस्करी अड्डे को स्थायी रूप से कब बंद किया जाएगा और जमील कुरैशी की कथित भूमिका की जांच कब पूरी होगी?
जमील कुरैशी पर कार्रवाई हुई या नहीं, पुलिस को स्पष्ट करना चाहिए
इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन के सामने अब एक महत्वपूर्ण चुनौती है। जमील कुरैशी का नाम स्थानीय स्तर पर कथित तस्करी नेटवर्क के मास्टरमाइंड के रूप में लिया जा रहा है। ऐसे में पुलिस को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या जमील कुरैशी के खिलाफ कोई स्वतंत्र जांच चल रही है? क्या उसकी भूमिका की जांच की जा रही है? क्या पूर्व में पकड़े गए गोवंश परिवहन के मामलों में उसका नाम सामने आया था? और यदि सामने आया था तो उसके खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई?
यदि जांच में जमील कुरैशी की कोई भूमिका नहीं मिलती है तो पुलिस को यह बात सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी चाहिए। लेकिन यदि जांच में उसकी भूमिका सामने आती है, तो कानून के मुताबिक कार्रवाई कर कथित तस्करी नेटवर्क की जड़ पर प्रहार करना जरूरी होगा।
क्योंकि सवाल अब सिर्फ 19 गोवंश और दो वाहनों का नहीं है। सवाल यह है कि कुरखेड़ा के गेवर्धा में कथित रूप से वर्षों से चल रहे गोवंश तस्करी नेटवर्क का असली संचालक कौन है और पुलिस उसकी जड़ तक कब पहुंचेगी?
दो आरोपियों पर मामला दर्ज
मामले में शेख इब्राहिम शेख इस्माइल और मुफस्सिल कुरैशी मोहम्मद जमील कुरैशी के खिलाफ कुरखेड़ा पुलिस थाने में अपराध क्रमांक 191/2026 दर्ज किया गया है। आरोपियों पर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11(1)(अ), 11(1)(ड), 11(1)(ई), महाराष्ट्र पशु संरक्षण अधिनियम 1976 की धारा 5(अ), 5(ब), 9 तथा भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक एम. रमेश के आदेश पर अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान) कार्तिक मधिरा, अपर पुलिस अधीक्षक (प्रशासन) गोकुल राज. जी और कुरखेड़ा के उपविभागीय पुलिस अधिकारी प्रमोद मडामे के मार्गदर्शन में की गई। कार्रवाई का नेतृत्व स्थानीय अपराध शाखा के पुलिस निरीक्षक अरुण फेगडे और कुरखेड़ा थाना प्रभारी पुलिस निरीक्षक अजय जगताप ने किया।
अब निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर हैं—क्या मामला सिर्फ 19 गोवंश और दो वाहनों की जब्ती तक सीमित रहेगा, या पुलिस गेवर्धा के कथित तस्करी अड्डे और कथित मास्टरमाइंड जमील कुरैशी की भूमिका की तह तक जाकर पूरे नेटवर्क को बेनकाब करेगी?
ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज..