करोड़ों के खेल में रेती घाट, विधायक मसराम के दौरे से हड़कंप

आरमोरी निर्वाचन क्षेत्र के विधायक रामदास मसराम

रेती घाट में CCTV नहीं, फेंसिंग नहीं—कुंभीटोला घाट पर गड़बड़ी की आशंका.

गढचिरौली जिले के कुरखेडा तहसील अंतर्गत कुंभीटोला रेती घाट एक बार फिर विवादों में आ गया है। आरमोरी विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक रामदास मसराम द्वारा 11 अप्रैल को किए गए दौरे के बाद घाट पर अनियमितताओं और अवैध उत्खनन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि घाट पर शासन के नियमों के अनुसार अनिवार्य सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं और डिमार्केशन के बाद की जाने वाली फेंसिंग भी नहीं की गई है। ऐसे में बिना निगरानी के बड़े पैमाने पर रेती उत्खनन होने की आशंका जताई जा रही है. इसके अलावा नदी से निकाली गई रेती को डंपिंग कर 24 घंटे ट्रांसपोर्ट करने की अनुमति के चलते महसूल विभाग की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है।

 विधायक रामदास मसराम का कहना

“कुंभीटोला रेती घाट पर निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। यहां ना तो सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और ना ही फेंसिंग की गई है, जो नियमों का उल्लंघन है। नदी में बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं, जिससे अवैध उत्खनन की आशंका है. यही तारामंगल एजेंसी का नाम इससे पहले भी नान्हीं रेती घाट मामले में सामने आ चुका है, जो लगभग 1 से डेढ़ महीने पहले विवादों में आई थी। अब वही एजेंसी कुंभीटोला रेती घाट में भी सवालों के घेरे में है, जहां नियमों के बाहर रेत उत्खनन होता दिखाई दे रहा है।

यह बेहद गंभीर मामला है और हैरानी की बात यह है कि पहले भी इस कंपनी पर कार्रवाई हो चुकी है, इसके बावजूद ऐसे हालात सामने आ रहे हैं। प्रशासन को इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।”

पहले भी सामने आ चुका है बड़ा मामला

नान्हीं रेती घाट में इससे पहले 786 ब्रास अवैध रेती डंपिंग का बड़ा मामला उजागर हो चुका है, जिसमें जिला प्रशासन ने तारामंगल एजेंसी पर 1 करोड़ 46 लाख 19 हजार 600 रुपये का जुर्माना लगाया था, जो अब तक जमा नहीं किया गया है। गौरतलब है कि तारामंगल एजेंसी को नान्हीं और कुंभीटोला—दोनों रेती घाट आवंटित किए गए थे। इन घाटों की बेस कीमत महज 32 लाख 5 हजार 200 रुपये थी, लेकिन एजेंसी ने इन्हें 2 करोड़ 25 लाख 21 हजार 992 रुपये की ऊंची बोली लगाकर हासिल किया था, जिसके चलते यह पहले ही चर्चा में आ गई थी। इसके बाद नान्हीं घाट पर करोड़ों के अवैध रेती डंपिंग का मामला सामने आने से एजेंसी पर गंभीर सवाल उठे और भारी जुर्माना भी लगा। अब यही एजेंसी कुंभीटोला रेती घाट में भी एक बार फिर विवादों और अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है, जिससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

अनुमति से ज्यादा उत्खनन की आशंका

कुंभीटोला रेती घाट पर तारामंगल एजेंसी को 1 हेक्टेयर क्षेत्र से 1908 ब्रास रेती उत्खनन की अनुमति दी गई है। लेकिन मौके पर नदी में बने बड़े-बड़े खड्डों को देखकर यह संदेह जताया जा रहा है कि तय सीमा से अधिक रेती निकाली जा चुकी है। इस तरह की स्थिति नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करती है और पूरे मामले को और गंभीर बना देती है। स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के बीच अब मांग की जा रही है कि जिला प्रशासन इस मामले की जल्द से जल्द जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।

सांसद ने भी उठाया मुद्दा

कांग्रेस सांसद नामदेव किरसान ने जिले में हो रही अवैध रेती तस्करी को गंभीर बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी स्तर की तस्करी बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं है. उन्होंने कहा, “अगर पॉलिटिशियन का सपोर्ट मिलता है, तभी इस तरह की तस्करी हो सकती है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मैंने गडचिरोली, चंद्रपुर और गोंदिया जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर जांच की मांग की है।”
सांसद ने यह भी कहा कि स्थानीय स्तर पर इतना बड़ा अवैध कारोबार संभव नहीं है और इसमें बड़े राजनीतिक लोगों की संलिप्तता की आशंका है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो जिले में अपराध बढ़ सकता है।

मिलीभगत की आशंका, अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

तारामंगल एजेंसी ने जब दो रेती घाट 2 करोड़ 25 लाख रुपये में हासिल किए, तब मोटी कमाई की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन पहले ही घाट में एजेंसी पर 1 करोड़ 46 लाख रुपये का जुर्माना लग गया. इतने बड़े पैमाने पर अवैध रेती डंपिंग होने के बावजूद यदि तहसीलदार, पटवारी और मंडल अधिकारी इस पर अनदेखी करते हैं, तो अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठना लाजमी है. चर्चा यह भी है कि कहीं बड़ी रकम के लेन-देन के चलते कार्रवाई में ढिलाई तो नहीं बरती जा रही। यदि ऐसा नहीं होता, तो कार्रवाई भी उतनी ही सख्त नजर आती।

कुरखेड़ा के तहसीलदार राहुल पाटिल इस मामले में बात करने से बचते नजर आए। बताया जाता है कि रेती घाट से जुड़े मामलों में वे फोन कॉल्स का जवाब भी नहीं दे रहे हैं. 11 अप्रैल को विधायक रामदास मसराम के दौरे के दौरान भी कई बार तहसीलदार को फोन किया गया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं किया गया।

फैक्ट बॉक्स: तारा मंगल एजेंसी विवाद

  • 786 ब्रास अवैध रेती डंपिंग का मामला
  • ₹1.46 करोड़ से अधिक का जुर्माना (अब तक बकाया)
  • 2 घाटों का अलॉटमेंट ₹2.25 करोड़ में
  • कुंभीटोला घाट पर भी अनियमितताओं के आरोप
  • 5342 ब्रास रेती खनन की अनुमति

तारा मंगल एजेंसी का पक्ष

तारामंगल एजेंसी के मालिक शंभू अग्रवाल ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि घाट पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और डिमार्केशन के बाहर कोई उत्खनन नहीं किया गया है. हालांकि फेंसिंग के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया और कहा कि वे जांच कर जानकारी देंगे.

अंत में सवाल

क्या प्रशासन इस बार सख्त कार्रवाई करेगा?
क्या अवैध रेती उत्खनन पर लगाम लगेगी?
या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज़…

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