जहां सड़कें और रास्ते बंद, वहां हेलीकॉप्टर बना जीवन की उम्मीद; भामरागढ़ से लाहेरी और फिर हेडरी तक पहुंचाए गए मरीज
गढ़चिरौली, ब्यूरो : दक्षिण गढ़चिरौली में लगातार बारिश और बाढ़ ने एक बार फिर दूरदराज के इलाकों की स्वास्थ्य व्यवस्था और आवागमन की हकीकत सामने ला दी है। भामरागढ़ तहसील में बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच जब सड़क मार्ग से मरीजों को तत्काल आगे के उपचार के लिए ले जाना मुश्किल था, तब लॉयड्स मेटल्स के हेलीकॉप्टर ने तीन गंभीर मरीजों को एयरलिफ्ट कर उपचार की सुविधा तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इन मरीजों में बिनागुंडा की सात वर्षीय संगीता चुक्कू उसेंडी भी शामिल है। संगीता को पहले लाहेरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लाया गया था। हालत गंभीर होने के बाद उसे आगे के उपचार के लिए हेलीकॉप्टर से हेडरी ले जाया गया। इसके साथ ही अपेक्षा ऋषी आलाम और रोशन चिना मडावी को भी एयरलिफ्ट किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इनमें सिकलसेल से पीड़ित मरीज भी शामिल है।
बाढ़ ने रोके रास्ते, हेलीकॉप्टर ने खोला जिंदगी का रास्ता
भामरागढ़ और दक्षिण गढ़चिरौली का इलाका हर साल बारिश के मौसम में प्राकृतिक आपदाओं से जूझता है। नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद कई इलाकों का संपर्क प्रभावित हो जाता है। ऐसी स्थिति में गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है।
यही वजह है कि इस बार तीन मरीजों का एयरलिफ्ट केवल एक राहत अभियान नहीं, बल्कि दुर्गम क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंच की गंभीर चुनौती को सामने लाने वाली घटना भी बन गया है।
आज तस्वीर कुछ ऐसी थी—एक तरफ बाढ़ और बंद रास्ते, दूसरी तरफ गंभीर मरीज और तत्काल इलाज की जरूरत। ऐसे समय में लॉयड्स मेटल्स का हेलीकॉप्टर मरीजों को तेजी से आगे के उपचार तक पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया गया।
लॉयड्स मेटल्स पर उठते सवालों के बीच सामने आई मदद की दूसरी तस्वीर
गढ़चिरौली में लॉयड्स मेटल्स के औद्योगिक विस्तार को लेकर अलग-अलग स्तर पर चर्चा और सवाल उठते रहे हैं। लेकिन इसी कंपनी के संसाधनों का इस्तेमाल जब आपदा के समय गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए होता है, तो तस्वीर का दूसरा पहलू भी सामने आता है।
सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि अगर उस वक्त हेलीकॉप्टर उपलब्ध नहीं होता तो बाढ़ और खराब आवागमन की स्थिति में इन मरीजों को कितनी जल्दी आगे के उपचार तक पहुंचाया जा सकता था?
इस सवाल का निश्चित जवाब देना संभव नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि आपात स्थिति में हवाई परिवहन ने मरीजों को सड़क मार्ग की बाधाओं से अलग एक वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराया।
एक तरफ स्टील सिटी का सपना, दूसरी तरफ बाढ़ में जूझता भामरागढ़
गढ़चिरौली को औद्योगिक और स्टील हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़े प्रोजेक्ट सामने आए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 2025 में गढ़चिरौली को स्टील हब के रूप में विकसित करने और ग्रीन स्टील को बढ़ावा देने की बात कही थी। सितंबर 2026 में भी उन्होंने विदर्भ और गढ़चिरौली को माइनिंग तथा ग्रीन स्टील के संभावित हब के रूप में रेखांकित किया।
लॉयड्स मेटल्स की अपनी परियोजना जानकारी के अनुसार, कंपनी कोंसरी में 3 MTPA फ्लैट प्रोडक्ट स्टील प्लांट सहित कई औद्योगिक परियोजनाओं पर काम कर रही है।
लेकिन इन बड़े औद्योगिक सपनों के बीच भामरागढ़ की बाढ़ एक अलग तस्वीर दिखाती है। जहां आज भी बारिश के दौरान सड़क संपर्क प्रभावित होता है, गंभीर मरीजों को निकालने के लिए विशेष इंतजाम करने पड़ते हैं और स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचना चुनौती बन जाता है।
बी. प्रभाकरण का नाम भी आया सामने
लॉयड्स मेटल्स के एमडी बी. प्रभाकरण कंपनी की गढ़चिरौली परियोजनाओं से जुड़े प्रमुख व्यक्ति हैं। कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट भी उन्हें लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड का प्रबंध निदेशक बताती है।
स्थानीय स्तर पर आपातकालीन परिस्थितियों में कंपनी के हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल की चर्चा होती रही है। हालांकि, किसी व्यक्ति द्वारा स्वयं हेलीकॉप्टर उड़ाकर कितनी घटनाओं में लोगों को बचाया गया, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं होती; इसलिए इसे संबंधित पक्ष के दावे या स्थानीय जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
सवाल—विकास आखिर किसके लिए और कितना?
आज की घटना केवल तीन मरीजों के एयरलिफ्ट की खबर नहीं है। यह गढ़चिरौली के विकास मॉडल पर भी सवाल खड़ा करती है।
क्या किसी जिले का विकास सिर्फ बड़े उद्योग, स्टील प्लांट और निवेश से मापा जाएगा? या फिर उस जिले के सबसे दूरदराज गांव में रहने वाले व्यक्ति को बारिश के दिनों में सड़क, अस्पताल और समय पर इलाज मिलना भी विकास का हिस्सा होगा?
भामरागढ़ के तीन मरीजों की कहानी यही सवाल सामने रखती है। एक तरफ गढ़चिरौली को देश के बड़े स्टील केंद्रों में शामिल करने की योजनाएं हैं, तो दूसरी तरफ बाढ़ के दौरान एक गंभीर मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर की जरूरत पड़ रही है।
और आज के दिन की सबसे बड़ी तस्वीर यही रही—बाढ़ ने रास्ते बंद किए, लेकिन एक हेलीकॉप्टर ने इलाज तक पहुंचने का रास्ता खोल दिया।
लॉयड्स मेटल्स के हेलीकॉप्टर ने तीन मरीजों को समय पर आगे के उपचार तक पहुंचाने में मदद की; अब सवाल यह है कि गढ़चिरौली में वह दिन कब आएगा, जब ऐसी दुर्गम परिस्थितियों में मरीजों को बचाने के लिए हेलीकॉप्टर की जरूरत कम पड़े और सड़क, पुल तथा स्वास्थ्य सुविधाएं खुद लोगों तक पहुंचें?
ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज़..