जियो की दादागिरी? ग्राहक का पैसा पूरा, इंटरनेट के दिन अधूरे

जियो एयर फाइबर की सेवा पर सवाल; 30 दिन के प्लान में ग्राहक को मिला सिर्फ 14 दिन इंटरनेट, 16 दिन का नुकसान कौन भरेगा?

 गढ़चिरौली, ब्युरो : कभी तेज इंटरनेट स्पीड के नाम पर ग्राहकों के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाने वाली जियो कंपनी की एयर फाइबर सेवा अब सवालों के घेरे में आती दिखाई दे रही है। ग्राहकों से प्लान की पूरी रकम लेने के बावजूद यदि इंटरनेट सेवा नियमित रूप से उपलब्ध नहीं होती, तो उस अवधि का नुकसान आखिर ग्राहक क्यों उठाए? कुरखेड़ा शहर में सामने आया एक मामला जियो की ग्राहक सेवा और एयर फाइबर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ग्राहकों का आरोप है कि जियो एयर फाइबर डिवाइस घर, कार्यालय या दुकान में इंस्टॉल होने के बाद भी कई बार तत्काल शुरू नहीं होता। डिवाइस में तकनीकी खराबी आने अथवा कनेक्शन सक्रिय नहीं होने पर ग्राहक को कस्टमर केयर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस दौरान ग्राहक का समय भी बर्बाद होता है और उसके द्वारा खरीदा गया इंटरनेट प्लान भी चलता रहता है।

₹807 का भुगतान, लेकिन सेवा शुरू होने में लगे 18 दिन

कुरखेड़ा शहर के ग्राहक नरेश सहारे के अनुसार, उन्होंने 5 अगस्त 2026 को अपने घर पर जियो एयर फाइबर का कनेक्शन लगवाया। कनेक्शन के लिए ₹707 का प्लान और ₹100 सदस्यता शुल्क, यानी कुल ₹807 का भुगतान किया गया। ग्राहक का कहना है कि इंस्टॉलेशन 5 अगस्त को होने के बावजूद जियो एयर फाइबर की इंटरनेट सेवा 23 अगस्त 2026 को शुरू हुई। यानी 5 अगस्त से 22 अगस्त तक करीब 18 दिन तक इंटरनेट सेवा का लाभ नहीं मिल सका। इसके बाद 23 अगस्त से इंटरनेट नियमित रूप से चलना शुरू हुआ और 5 सितंबर 2026 को प्लान समाप्त हो गया। सवाल यह है कि जब ग्राहक ने 30 दिन के इंटरनेट प्लान का भुगतान किया था, तो उसे पूरे 30 दिन की सेवा क्यों नहीं मिली?

30 दिन का प्लान, इस्तेमाल सिर्फ 14 दिन

ग्राहक के मुताबिक, उसे 30 दिनों की सेवा के बदले केवल 14 दिन ही इंटरनेट इस्तेमाल करने का अवसर मिला। उसके अनुसार, उसके प्लान में लगभग 840 जीबी डेटा अभी भी शेष था, लेकिन निर्धारित अवधि समाप्त होने के साथ ही यह डेटा भी उपयोग से बाहर हो गया। ग्राहक का कहना है कि जब सेवा कंपनी की तकनीकी समस्या के कारण निर्धारित अवधि में उपलब्ध नहीं हुई, तो उस अवधि की भरपाई कंपनी को करनी चाहिए थी। इसी मांग को लेकर ग्राहक ने जियो कस्टमर केयर से संपर्क किया और मांग रखी कि जिस अवधि में इंटरनेट सेवा बंद रही, उतने दिन की सेवा आगे बढ़ाई जाए।

कस्टमर केयर में शिकायत, लेकिन समाधान के बजाय ‘मेंटेनेंस’

ग्राहक का आरोप है कि शिकायत के बाद भी उसकी समस्या का संतोषजनक समाधान नहीं किया गया। इसके बजाय जियो होम एयर फाइबर कनेक्शन को कथित तौर पर मेंटेनेंस में डाल दिया गया, जिससे ग्राहक की परेशानी और बढ़ गई। ग्राहक के अनुसार, जब डिवाइस में खराबी आती है या डिवाइस शुरू नहीं होता, तब डीलर अथवा इंजीनियर की ओर से भी तत्काल समाधान उपलब्ध नहीं कराया जाता। कई बार ग्राहक को केवल इंतजार करने के लिए कहा जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब ग्राहक समय पर कंपनी को पूरा भुगतान कर रहा है, तो कंपनी की तकनीकी समस्या के कारण सेवा बंद रहने का नुकसान भी ग्राहक ही क्यों उठाए?

डेटा बचा, लेकिन समय खत्म—ग्राहक का दोहरा नुकसान

जियो एयर फाइबर जैसे प्लान में ग्राहक एक निश्चित अवधि और डेटा लिमिट के लिए भुगतान करता है। यदि तकनीकी कारणों से इंटरनेट कई दिनों तक बंद रहता है और प्लान की वैधता उसी अवधि में समाप्त हो जाती है, तो ग्राहक का बचा हुआ डेटा भी बेकार हो जाता है। यानी ग्राहक ने पैसे पूरे दिए, लेकिन सेवा पूरी नहीं मिली। यही बात इस मामले में सबसे बड़ा सवाल बनकर सामने आई है। ग्राहक का कहना है कि यदि 30 दिन के प्लान में कंपनी की तकनीकी समस्या के कारण 16 दिन इंटरनेट उपलब्ध नहीं हुआ, तो कम से कम उन 16 दिनों की वैधता बढ़ाकर ग्राहक को दी जानी चाहिए।

कंपनी ने टावरों का जाल बिछाया, लेकिन सर्विस व्यवस्था पर सवाल

जियो ने इंटरनेट सेवा को मजबूत बनाने के लिए शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक अपना नेटवर्क विस्तार किया है। शुरुआती दौर में तेज इंटरनेट स्पीड और किफायती प्लान के कारण बड़ी संख्या में ग्राहकों ने जियो को अपनाया। लेकिन अब कुछ ग्राहक इंटरनेट की स्पीड और एयर फाइबर सेवा की तकनीकी समस्याओं को लेकर सवाल उठाने लगे हैं। ग्राहकों का कहना है कि केवल नेटवर्क और टावर खड़े कर देने से सेवा बेहतर नहीं होती, बल्कि कस्टमर सपोर्ट, तकनीकी टीम और खराब डिवाइस को समय पर बदलने की व्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए।

अब एयरटेल की ओर बढ़ रहा ग्राहकों का रुझान?

कभी इंटरनेट स्पीड के मामले में जियो को प्राथमिकता देने वाले कुछ ग्राहक अब अन्य कंपनियों के विकल्प तलाश रहे हैं। कई जगहों पर ग्राहक एयरटेल की सेवा को भी विकल्प के रूप में देखने लगे हैं। हालांकि ग्रामीण और कुछ दूरदराज इलाकों में एयरटेल के नेटवर्क टावरों की उपलब्धता अभी सीमित होने के कारण ग्राहकों के पास विकल्प कम हैं। लेकिन यदि भविष्य में एयरटेल का 5G नेटवर्क और अन्य इंटरनेट सेवाओं का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों तक होता है, तो जियो के सामने ग्राहकों को बनाए रखने की चुनौती बढ़ सकती है।

बीएसएनएल के बाद जियो, अब अगली बारी किसकी?

एक समय ग्रामीण भारत में बीएसएनएल का व्यापक नेटवर्क था। गांव-गांव और मोहल्ले-मोहल्ले में बीएसएनएल की मौजूदगी थी, लेकिन इंटरनेट स्पीड और तकनीकी बदलाव के साथ निजी कंपनियों ने बाजार में अपनी जगह मजबूत की। जियो ने भी इसी बदलाव का फायदा उठाते हुए ग्राहकों को तेज इंटरनेट और किफायती प्लान उपलब्ध कराकर बड़ी संख्या में ग्राहक जोड़े। लेकिन अब यदि ग्राहकों को प्लान के मुताबिक सेवा, स्पीड और तकनीकी सहायता नहीं मिलती है, तो वही ग्राहक दूसरी कंपनियों की ओर रुख कर सकते हैं।

‘पैसे पूरे तो सेवा भी पूरी चाहिए’

कुरखेड़ा के इस मामले ने जियो एयर फाइबर की ग्राहक सेवा को लेकर एक सीधा सवाल खड़ा कर दिया है—यदि ग्राहक ने 30 दिन के प्लान का पूरा भुगतान किया है और कंपनी की तकनीकी समस्या के कारण उसे केवल 14 दिन सेवा मिली, तो बाकी 16 दिनों की भरपाई कौन करेगा? ग्राहक की मांग भी स्पष्ट है कि जिस अवधि में कंपनी की तकनीकी समस्या के कारण इंटरनेट बंद रहा, उतनी अवधि की वैधता आगे बढ़ाई जाए। अब देखना यह होगा कि जियो कंपनी इस शिकायत को ग्राहक की व्यक्तिगत समस्या मानकर टालती है या फिर इसे अपनी सेवा व्यवस्था में सुधार का अवसर मानते हुए ग्राहक को वास्तविक राहत देती है। क्योंकि ग्राहक का पैसा एक दिन भी कम नहीं लिया जाता, तो फिर सेवा के दिन कम क्यों दिए जाएं?

ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज़..

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