गढ़चिरौली में हरित इस्पात क्रांति की तैयारी, जॉन कॉकरिल इंडिया के साथ महाराष्ट्र सरकार का करार

हरित लोहा-इस्पात तकनीक के पायलट प्रोजेक्ट को मिलेगी गति; स्थानीय युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद

गढ़चिरौली ब्यूरो : खनिज संपदा से समृद्ध गढ़चिरौली अब पारंपरिक खनन और उद्योग से आगे बढ़ते हुए हरित लोहा एवं हरित इस्पात उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने गढ़चिरौली में आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल तकनीक पर आधारित पायलट एवं प्रदर्शन परियोजना स्थापित करने के लिए जॉन कॉकरिल इंडिया लिमिटेड के साथ 4 सितंबर को महत्वपूर्ण समझौता किया है। इससे जिले के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

मुंबई में बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डे वेव्हर, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की उपस्थिति में इस सामंजस्य करार का औपचारिक आदान-प्रदान किया गया। गढ़चिरौली में उपलब्ध लौह अयस्क संसाधनों का इस्तेमाल आधुनिक एवं पर्यावरणपूरक तकनीक के माध्यम से करने की दृष्टि से इस समझौते को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या है हरित इस्पात तकनीक?

वर्तमान में पारंपरिक इस्पात निर्माण प्रक्रिया में कोयले और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। इससे कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है। इसी चुनौती को देखते हुए जॉन कॉकरिल द्वारा विकसित हरित तकनीक का गढ़चिरौली में परीक्षण और प्रदर्शन किया जाएगा।

इस परियोजना के माध्यम से तकनीक की उपयोगिता, व्यावहारिकता और बड़े औद्योगिक स्तर पर इस्तेमाल की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा। सफल होने पर भविष्य में गढ़चिरौली को हरित लोहा और हरित इस्पात उत्पादन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में यह अहम कदम साबित हो सकता है।

‘वोल्टेरॉन’ तकनीक पर रहेगा फोकस

जॉन कॉकरिल की तकनीक में ‘वोल्टेरॉन’ अवधारणा को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें कम तापमान वाली इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के जरिए अक्षय ऊर्जा का उपयोग करते हुए लौह अयस्क से लोहा प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है।

इस तकनीक से पारंपरिक उत्पादन पद्धति में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने की संभावना है। गढ़चिरौली जैसे खनिज संपन्न जिले में इस तकनीक का प्रयोग औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तकनीक के साथ स्थानीय युवाओं को भी मिलेगा फायदा

प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य केवल नई तकनीक का परीक्षण करना नहीं है। भविष्य में विकसित होने वाली औद्योगिक व्यवस्था के लिए आवश्यक कुशल मनुष्यबल तैयार करने पर भी जोर दिया जाएगा।

राज्य की संबंधित संस्थाओं, उद्योग क्षेत्र और जॉन कॉकरिल के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान तथा तकनीकी सहयोग बढ़ाने के साथ ही स्थानीय युवक-युवतियों के कौशल विकास को प्रोत्साहन देने की योजना है। इससे आने वाले समय में जिले के युवाओं के लिए रोजगार और प्रशिक्षण के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

गढ़चिरौली के खनिज को मिलेगा स्थानीय स्तर पर मूल्यवर्धन

गढ़चिरौली में बड़े पैमाने पर लौह अयस्क उपलब्ध है। हालांकि, इस खनिज संपदा पर आधारित बड़े और तकनीक आधारित उद्योगों का विकास लंबे समय से जिले के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है।

हरित इस्पात परियोजना इस स्थिति को बदलने की दिशा में एक अवसर के रूप में देखी जा रही है। यदि परियोजना सफल होती है, तो स्थानीय लौह अयस्क का मूल्यवर्धन, नए उद्योगों की स्थापना, रोजगार निर्माण और कौशल विकास को गति मिल सकती है।

इसके साथ ही हरित इस्पात से जुड़े सहायक उद्योग और छोटे-बड़े व्यवसाय भी भविष्य में जिले में विकसित होने की संभावना है। महाराष्ट्र सरकार की ओर से परियोजना के लिए आवश्यक मंजूरियां, अनुमति और नीतिगत सहयोग उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

नक्सल प्रभावित जिले के रूप में पहचाने जाने वाले गढ़चिरौली में अब खनिज संपदा के साथ आधुनिक तकनीक और औद्योगिक विकास का नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद है। हरित लोहा और हरित इस्पात की दिशा में यह पहल जिले की अर्थव्यवस्था और युवाओं के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज़..

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