करोड़ों की निधि, फिर भी सुरक्षा बदहाल! जपतलाई आश्रमशाला में सर्पदंश से 3 छात्राओं की मौत, 3 गंभीर; एक छात्रा नागपुर एयरलिफ्ट

जपतलाई आश्रम स्कूल कांग्रेस के पूर्व सांसद मारोतराव कोवासे से जुड़े होने की वजह से बचाने की कोशिश!

गढचिरौली दि. 11 अगस्त 2026   : गडचिरोली जिले के धानोरा तालुका के जपतलाई स्थित अनुदानित आश्रमशाला में जहरीले सांप के काटने से तीन छात्राओं की मौत का मामला सामने आया है. वहीं तीन छात्राएं गंभीर रूप से घायल हैं। इनमें से एक छात्रा की हालत गंभीर होने के कारण उसे एयरलिफ्ट कर नागपुर के अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया है. इस दर्दनाक घटना के बाद आश्रमशाला की सुरक्षा व्यवस्था और संस्था प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. खास बात यह है कि संस्था को पिछले 3 वर्षों में 1 करोड़ 30 लाख रुपये से ज्यादा की सरकारी निधि मिलने की जानकारी है. इसके बावजूद छात्रावास में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं थे?

आखिर उस रात हुआ क्या था? पूरी खबर विस्तार से देखते हैं।

गडचिरोली जिले के धानोरा तालुका के जपतलाई स्थित यह अनुदानित आश्रमशाला वर्ष 1992 से 100% अनुदानित बताई जा रही है। इसी आश्रमशाला में रविवार रात करीब 2 बजे एक जहरीला मन्यार सांप छात्राओं के छात्रावास में घुस गया. रात के समय छात्राएं गहरी नींद में थीं। इसी दौरान सांप खिड़की के रास्ते छात्रावास के अंदर पहुंचा और सो रही छात्राओं को काट लिया। अचानक सर्पदंश की घटना सामने आने के बाद छात्रावास में अफरा-तफरी मच गई. बताया जा रहा है कि, इस घटना में कुल छह छात्राएं सर्पदंश की चपेट में आईं. इनमें से तीन छात्राओं की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य छात्राओं को गंभीर हालत में तत्काल जिला अस्पताल गडचिरोली में भर्ती कराया गया. मृत छात्राओं की पहचान सुस्मिता मंडल उम्र (14) वर्ष, दीपिका लकड़ा उम्र (12 )वर्ष और अनु कोरेटी उम्र (8 )वर्ष के रूप में हुई है.  तीनों छात्राएं आश्रमशाला में रहकर अपनी पढ़ाई कर रही थीं. मासूम छात्राओं की मौत की खबर सामने आने के बाद पूरे जिले में शोक और आक्रोश का माहौल है।

वहीं सर्पदंश से गंभीर रूप से घायल दीपिका मडावी की हालत इलाज के दौरान गंभीर बताई गई। उसकी हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे बेहतर उपचार के लिए नागपुर भेजने का फैसला लिया। इसके बाद दीपिका को एयरलिफ्ट के जरिए नागपुर ले जाया गया, जहां उसका उपचार जारी है।

एक हॉल में सो रही थीं 79 छात्राएं

इस आश्रमशाला में कुल 233 विद्यार्थी शिक्षा ले रहे हैं। इनमें छात्र और छात्राएं दोनों शामिल हैं। इनमें से 79 छात्राएं एक ही हॉल में सो रही थीं, जबकि बाकी छात्राएं और छात्र दूसरे हॉल में सो रहे थे. जिस हॉल में 79 छात्राएं सो रही थीं, उसके आसपास की व्यवस्था अब सवालों के घेरे में आ गई है। बताया जा रहा है कि छात्रावास के आसपास कचरे का ढेर, जलाऊ लकड़ियां और ईंटों का ढेर रखा हुआ था. आरोप है कि इन्हीं ईंटों के ढेर के सहारे जहरीला मन्यार सांप खिड़की तक पहुंचा और छात्रावास की खिड़कियों खुली रहने की वजह से  वहां से छात्रावास के अंदर दाखिल हुआ।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिस जगह पर दर्जनों छात्राएं रात में सो रही थीं, वहां आसपास का परिसर साफ क्यों नहीं रखा गया? खिड़कियों को सुरक्षित क्यों नहीं किया गया? और जहरीले सांपों से बचाव के लिए पहले से कोई प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

बेड की व्यवस्था को लेकर भी सवाल

घटना के बाद आश्रमशाला में विद्यार्थियों के लिए बेड की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आश्रमशाला के मुख्याध्यापक पामशेट्टीवार के मुताबिक, शासन की ओर से वर्ष 2024 से निवासी अनुदानित आश्रमशालाओं में विद्यार्थियों के सोने के लिए खाट या बेड की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे।

मुख्याध्यापक का कहना है कि करीब 15 दिन पहले ही छात्राओं को बेड उपलब्ध कराए गए थे और आगे पलंग की व्यवस्था भी की जानी थी। हालांकि घटना के बाद अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से यह सवाल उठाया जा रहा है कि जब शासन के निर्देश पहले से मौजूद थे, तो विद्यार्थियों के लिए पूरी व्यवस्था समय पर क्यों नहीं की गई?

तीन वर्षों में 1 करोड़ 30 लाख से ज्यादा की निधि

अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सरकारी निधि को लेकर उठ रहा है. जानकारी के मुताबिक वर्ष 2024-25, 2025-26 और 2026-27, इन तीन वर्षों के दौरान संस्था को ATC विभाग, नागपुर की ओर से कुल 1 करोड़ 30 लाख 31 हजार 900 रुपये की निधि प्राप्त हुई है.इसके अलावा शासन की ओर से विद्यार्थियों के परिपोषण के लिए प्रति विद्यार्थी प्रति माह 2,200 रुपये दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है.ऐसे में सवाल यह है कि जब संस्था को विद्यार्थियों की देखभाल और व्यवस्था के लिए इतनी बड़ी राशि मिल रही थी, तो छात्रावास में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत क्यों नहीं की गई?

क्या इस निधि से छात्राओं के लिए पर्याप्त बेड, सुरक्षित खिड़कियां, साफ-सफाई और छात्रावास परिसर को सांपों जैसे जहरीले जीवों से सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं की जा सकती थी? अब यही सवाल अभिभावक और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशासन से पूछ रहे हैं।

संस्था प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग

3 मासूम छात्राओं की मौत के बाद जपतलाई आश्रमशाला के संस्था प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है. सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से संस्था की कार्यप्रणाली की जांच करने, लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने और आश्रमशाला की मान्यता रद्द करने की मांग की जा रही है।

साथ ही शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच करने की मांग उठ रही है। आरोप लगाया जा रहा है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान दिया गया होता तो शायद यह दर्दनाक घटना टाली जा सकती थी।

जपतलाई की यह आश्रमशाला पूर्व सांसद मारोतराव कोवासे से जुड़ी संस्था की बताई जा रही है। घटना के बाद संस्था को कथित राजनीतिक संरक्षण दिए जाने को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि इन राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

अधीक्षिका के निलंबन पर भी सवाल

घटना वाले दिन आश्रमशाला की अधीक्षिका छुट्टी पर थीं। इसके बावजूद संस्था प्रबंधन की ओर से उन्हें अपने लेटरहेड पर निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई.बताया गया कि निलंबन से संबंधित पत्र पत्रकारों और सोशल मीडिया के माध्यम से भी प्रसारित किया गया। अब इस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि घटना के बाद जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया किस आधार पर और किस तरीके से अपनाई गई।

सह पालकमंत्री आशिष जयस्वाल पहुंचे जपतलाई

घटना की गंभीरता को देखते हुए गडचिरोली जिले के सह पालकमंत्री आशिष जयस्वाल ने मामले का संज्ञान लिया और जपतलाई पहुंचकर आश्रमशाला का जायजा लिया. सह पालकमंत्री के दौरे के दौरान संस्था प्रबंधन की मौजूदगी को लेकर भी नाराजगी सामने आई। बताया गया कि उनके पहुंचने तक संस्था के पदाधिकारी मौके पर मौजूद नहीं थे, जिसको लेकर मृत छात्राओं के परिजनों और अभिभावकों में रोष देखने को मिला. एक तरफ ग्रामीण और अभिभावक संस्था प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन से तत्काल न्याय और उचित मुआवजे की मांग की जा रही थी।

शव उठाने से पहले रखी गईं मांगें

घटना के बाद मृत छात्राओं के परिजन और रिश्तेदार बेहद आक्रोशित थे। अपनी मांगें पूरी होने तक उन्होंने मृत छात्राओं के शव उठाने से इनकार कर दिया था. उद्धव ठाकरे गुट शिवसेना के जिलाध्यक्ष  पवन गेडाम, वंचित बहुजन आघाडी  के जिलाध्यक्ष बालू टेंभुर्णे और समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष राज बनसोड ने भी मृत छात्राओं के परिजनों की मांगों को लेकर प्रशासन के सामने आवाज उठाई. परिजनों की मांग थी कि घटना की गंभीरता से जांच की जाए, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो और मृत छात्राओं के परिवारों को उचित आर्थिक सहायता दी जाए. कई घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद प्रशासन की ओर से मृत छात्राओं के परिवारों को तत्काल एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई।

14 अगस्त को मुआवजे पर क्या फैसला?

अब सभी की नजरें 14 अगस्त पर टिकी हैं। इसी दिन सह पालकमंत्री आशिष जयस्वाल के गडचिरोली दौरे के दौरान मृत छात्राओं के परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता और मुआवजे को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा. मृत छात्राओं के परिवारों की मांग है कि उन्हें उचित आर्थिक सहायता मिले और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

सबसे बड़ा सवाल—जिम्मेदार कौन?

जपतलाई आश्रमशाला की यह घटना सिर्फ तीन छात्राओं की मौत तक सीमित नहीं है। इसने जिले की आश्रमशालाओं में विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. एक तरफ आश्रमशाला में कुल 233 विद्यार्थी हैं, 79 छात्राएं एक ही हॉल में सो रही थीं, छात्रावास के आसपास कचरा, जलाऊ लकड़ियां और ईंटों का ढेर मौजूद था। दूसरी तरफ संस्था को तीन वर्षों में 1 करोड़ 30 लाख 31 हजार 900 रुपये की निधि मिलने की जानकारी सामने आई है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब विद्यार्थियों की व्यवस्था के लिए सरकारी निधि उपलब्ध थी, तो सुरक्षा व्यवस्था इतनी बदहाल क्यों थी?

क्या इस मामले में सिर्फ सांप को जिम्मेदार माना जाएगा, या फिर उस लापरवाही की भी जांच होगी जिसके कारण जहरीले सांप को छात्रावास तक पहुंचने का मौका मिला? तीन मासूम छात्राओं की मौत के बाद अब अभिभावक सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, जवाबदेही और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज़…

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