सूखाग्रस्त क्षेत्रों के विद्यार्थियों से परीक्षा शुल्क न लें, वसूला है तो तुरंत लौटाएं : चंद्रकांतदादा पाटील

परीक्षा शुल्क वसूलने वाले महाविद्यालयों पर होगी कड़ी कार्रवाई; शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से एक समान शैक्षणिक समय-सारणी लागू करने के निर्देश

मुंबई, 14 अक्टूबर। महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आर्थिक राहत देने के लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने निर्देश दिए हैं कि सूखाग्रस्त क्षेत्रों के विद्यार्थियों से परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाए। यदि किसी विद्यार्थी से पहले ही परीक्षा शुल्क वसूल किया गया है, तो उसे तत्काल वापस किया जाए। विद्यार्थियों से शुल्क वसूलने वाले महाविद्यालयों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

मुंबई के सह्याद्री अतिथिगृह में मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील की अध्यक्षता में राज्य के सभी सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई। बैठक में सूखाग्रस्त क्षेत्रों के विद्यार्थियों की परीक्षा शुल्क माफी, पेपर लीक रोकने, परीक्षा परिणामों में एकरूपता, शैक्षणिक समय-सारणी, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और विद्यार्थी चुनावों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

मंत्री पाटील ने स्पष्ट किया कि राज्य में सूखे की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी महाविद्यालयों को विद्यार्थियों से परीक्षा शुल्क नहीं लेने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें इंजीनियरिंग कॉलेज, कला महाविद्यालय और विभाग के अंतर्गत आने वाले अन्य महाविद्यालय शामिल हैं। विद्यार्थियों पर आर्थिक बोझ न पड़े, इसलिए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने सभी कुलपतियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा।

पेपर लीक करने वालों पर होगी कठोर कार्रवाई

बैठक में विश्वविद्यालयों की परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रभावी उपाय करने पर जोर दिया गया। केंद्र सरकार द्वारा परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक को रोकने के लिए बनाए गए कानून के प्रावधानों को महाराष्ट्र में लागू करने के संबंध में भी चर्चा की गई। मंत्री पाटील ने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी या पेपर लीक के मामलों में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। संबंधित कानून के प्रावधानों के तहत दोषियों को 10 वर्ष तक की कैद और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए विश्वविद्यालयों को परीक्षा व्यवस्था में आवश्यक सावधानियां बरतने के निर्देश दिए गए।

रिजल्ट घोषित होते ही डिजिलॉकर पर मिलेंगे डिग्री प्रमाणपत्र

विद्यार्थियों की सुविधा के लिए अगले शैक्षणिक वर्ष से विश्वविद्यालयों को परिणाम घोषित होते ही डिग्री प्रमाणपत्र डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इससे विशेष रूप से विदेश में उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश प्रक्रिया और अन्य शैक्षणिक कार्यों में सुविधा मिलेगी। प्रमाणपत्रों के लिए बार-बार विश्वविद्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे विद्यार्थियों का समय और मेहनत बचेगी।

2026-27 से लागू होगी एक समान शैक्षणिक समय-सारणी

राज्य के सभी सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों में एकरूपता लाने के लिए शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से एक समान शैक्षणिक समय-सारणी लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप चार वर्षीय ऑनर्स डिग्री पाठ्यक्रम की उचित संरचना तैयार कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन करने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा पुनर्परीक्षा (Re-examination) और एटीकेटी (ATKT) से संबंधित नियमों में एकरूपता लाने के लिए राज्य के सभी विश्वविद्यालयों हेतु एक समान नीति तैयार करने की आवश्यकता जताई गई।

विद्यार्थियों की समस्याएं जानने के लिए छात्रावास में रुकेंगे मंत्री

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील 15 दिसंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 के बीच राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों का दौरा करेंगे। इस दौरान वे विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था और विद्यार्थियों को उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा करेंगे। साथ ही, छात्रावास में विद्यार्थियों के साथ रात बिताकर रहने, भोजन, स्वच्छता, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का प्रत्यक्ष निरीक्षण करेंगे। विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं, अपेक्षाएं और सुझाव भी जानेंगे, ताकि आवश्यक सुधार किए जा सकें।

विश्वविद्यालयों में विद्यार्थी चुनावों पर अंतिम रिपोर्ट के निर्देश

राज्य के विश्वविद्यालयों में विद्यार्थी चुनाव कराने को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। मंत्री पाटील ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि दिवाली के बाद चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया जाए और चुनाव किस पद्धति से आयोजित किए जा सकते हैं, इस संबंध में विस्तृत अध्ययन कर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

बैठक में प्रधान सचिव रणजीत सिंह देओल, तकनीकी शिक्षा विभाग के संचालक डॉ. प्रमोद नाईक, उच्च शिक्षा संचालक डॉ. शैलेंद्र देवळाणकर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और राज्य के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित रहे।

मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने कहा कि राज्य सरकार विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों की रक्षा, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, डिजिटल सुविधाओं के विस्तार और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है।

ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज..

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