सोना खरीदी में सावधान! कच्चे बिल के खेल में ग्राहक ठगी का शिकार

कम कैरेट का गहना देकर 24 कैरेट के भाव से वसूलते है ज्वेलर्स

ग्रामीण क्षेत्रों में सोने की खरीदारी के दौरान एक गंभीर समस्या सामने आ रही है। यहां कई ज्वेलर्स ग्राहकों को GST वाला पक्का बिल देने के बजाय “कच्चा बिल” देकर मामला रफादफा कर देते हैं। ग्राहकों को उस समय यह सामान्य लगता है, लेकिन बाद में यही लापरवाही भारी नुकसान का कारण बनती है. जानकारी के अनुसार, कई दुकानदार टैक्स बचाने के लिए जानबूझकर बिना GST बिल के ही सोना बेचते हैं। ग्राहक को सिर्फ एक साधारण पर्ची या हाथ से लिखा बिल थमा दिया जाता है, जिसमें न तो सही कैरेट की जानकारी होती है और न ही हॉलमार्क या HUID नंबर का जिक्र।

कैसे होता है नुकसान?

जब ग्राहक कुछ समय बाद उस सोने को बेचने या बदलने के लिए जाता है, तो उसकी असलियत सामने आती है। कई मामलों में गहनों की शुद्धता कम निकलती है या सोना खराब क्वालिटी का होता है। लेकिन क्योंकि ग्राहक के पास GST वाला वैध बिल नहीं होता, इसलिए वह कानूनी कार्रवाई नहीं कर पाता।

ग्रामीण ग्राहकों की मजबूरी:

ग्रामीण इलाकों में लोग अक्सर पुलिस थाना या कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने से डरते हैं। जानकारी और कानूनी प्रक्रिया की कमी के कारण वे शिकायत दर्ज कराने से बचते हैं। इसी डर और जागरूकता की कमी का फायदा उठाकर कुछ ज्वेलर्स खुलेआम नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।
कानून क्या कहता है?

उपभोक्ता कानून के तहत हर ग्राहक को पक्का बिल लेना जरूरी है। GST बिल के बिना किसी भी प्रकार की शिकायत को साबित करना मुश्किल हो जाता है। हॉलमार्क और HUID नंबर भी अनिवार्य हैं, जो सोने की शुद्धता की गारंटी देते हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी:

विशेषज्ञों का कहना है कि “सस्ता या “बिना बिल” का लालच आगे चलकर बड़ा नुकसान कर सकता है। कुछ रुपये बचाने के चक्कर में ग्राहक हजारों का घाटा उठा बैठते हैं।

अपील:
ग्रामीण क्षेत्रों के ग्राहकों से अपील है कि सोना खरीदते समय हमेशा GST वाला पक्का बिल लें, हॉलमार्क और कैरेट की जांच करें और किसी भी तरह की धोखाधड़ी होने पर बिना डर के संबंधित विभाग या पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं।

ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज़…

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