गोंडवाना विश्वविद्यालय में ‘आकाशवेध’ कार्यक्रम, विद्यार्थियों ने किया शनि ग्रह और गहन अंतरिक्ष का अवलोकन

PGTD भौतिकी के विद्यार्थियों ने दूरबीन से देखे शनि के आकर्षक वलय, तारों और नीहारिकाओं का भी किया अध्ययन

गडचिरोली,ब्यूरो : माननीय कुलपति डॉ. प्रशांत बोकारे की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में गोंडवाना विश्वविद्यालय, गडचिरोली के पदव्युत्तर अध्यापन विभाग (PGTD), भौतिकी विभाग की ओर से M.Sc. भौतिकी के विद्यार्थियों के लिए ‘आकाशवेध’ आकाश-दर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में खगोल विज्ञान, खगोल भौतिकी, प्रेक्षणात्मक भौतिकी और अंतरिक्ष अनुसंधान के प्रति वैज्ञानिक जिज्ञासा तथा रुचि विकसित करना था।

पाठ्यपुस्तक से निकलकर विद्यार्थियों ने किया प्रत्यक्ष खगोलीय अवलोकन

कुलपति डॉ. प्रशांत बोकारे विद्यार्थियों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखते हुए प्रत्यक्ष अवलोकन, प्रयोग और अनुभवात्मक शिक्षण के माध्यम से विज्ञान को समझने के लिए निरंतर प्रोत्साहित करते रहे हैं। इसी वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रेरणा के चलते ‘आकाशवेध’ जैसे अभिनव शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

दूरबीन से विद्यार्थियों ने देखा शनि ग्रह

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण शनि ग्रह का दूरबीन के माध्यम से प्रत्यक्ष अवलोकन रहा। विद्यार्थियों ने Celestron NexStar 8SE Advanced GoTo Telescope की सहायता से शनि ग्रह का निरीक्षण किया। यह आधुनिक दूरबीन स्वचालित GoTo एवं Tracking System से लैस है, जो आकाशीय पिंडों की स्थिति को सटीक रूप से खोजने के साथ-साथ उनकी आकाश में होने वाली आभासी गति का लगातार अनुसरण करने में सक्षम है।

शनि के वलयों ने विद्यार्थियों का खींचा ध्यान

दूरबीन से दिखाई देने वाले शनि के आकर्षक वलय यानी Rings विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इस दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि शनि के वलय मुख्य रूप से बर्फ के कणों, चट्टानी टुकड़ों और धूल के कणों से बने हैं। इन कणों का आकार बेहद छोटे धूलकणों से लेकर अपेक्षाकृत बड़े टुकड़ों तक हो सकता है।

शनि सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह

अवलोकन के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि शनि सूर्य से छठा और सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है। यह मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम से बना एक गैसीय दानव यानी Gas Giant है। पृथ्वी के विपरीत शनि का कोई ठोस पृष्ठभाग नहीं है।

शनि के उपग्रहों की भी मिली जानकारी

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को शनि के विभिन्न उपग्रहों के बारे में भी जानकारी दी गई। इनमें टाइटन, एन्सेलाडस, रिया, आइएपेटस और मिमास प्रमुख हैं।

टाइटन शनि का सबसे बड़ा उपग्रह है और इसका घना वायुमंडल है। वहीं एन्सेलाडस एक बर्फीला उपग्रह है, जिसके नीचे तरल जल का महासागर होने के प्रमाण मिले हैं। इसी कारण एन्सेलाडस ग्रह विज्ञान और संभावित परग्रही जीवन के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

तारों, नीहारिकाओं और Deep-Sky Objects का भी अवलोकन

शनि ग्रह के साथ विद्यार्थियों ने विभिन्न तारों, नीहारिकाओं (Nebulae) और Deep-Sky Objects को खोजने तथा उनका अवलोकन करने का प्रयास किया। GoTo Telescope की सहायता से विद्यार्थियों ने आकाशीय पिंडों की स्थिति निर्धारित करने और उनकी सटीक ट्रैकिंग करने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।

कक्षा की थ्योरी को वास्तविक अवलोकन से जोड़ा

अवलोकन के दौरान विद्यार्थियों ने ग्रहों की गति, गुरुत्वाकर्षण, प्रकाश का संचरण, उपग्रहों की कक्षीय गति, शनि के वलयों की संरचना तथा खगोलीय दूरबीनों के कार्य सिद्धांत जैसे विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़ी गई सैद्धांतिक भौतिकी को वास्तविक खगोलीय अवलोकन से जोड़ने का अवसर मिला।

विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ लिया हिस्सा

M.Sc. भौतिकी के विद्यार्थियों ने तारों और विभिन्न आकाशीय पिंडों के अवलोकन में उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने शनि ग्रह और अन्य खगोलीय पिंडों को देखकर उत्साह व्यक्त किया। इस दौरान उन्होंने तारे, ग्रह, नीहारिकाएं, ग्रह प्रणालियां, खगोल भौतिकी और अंतरिक्ष अन्वेषण से जुड़े विभिन्न विषयों पर सक्रिय चर्चा भी की।

PGTD भौतिकी विभाग के शिक्षकों का मार्गदर्शन

इस कार्यक्रम का आयोजन PGTD भौतिकी विभाग के शिक्षकों डॉ. अपर्णा भाके, डॉ. नंदकिशोर मेश्राम, डॉ. प्रितेश जाधव एवं श्री विकास पुंसे के मार्गदर्शन में किया गया।

वैज्ञानिक सोच और अनुसंधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

‘आकाशवेध’ कार्यक्रम गोंडवाना विश्वविद्यालय के PGTD भौतिकी विभाग की एक महत्वपूर्ण अनुभवात्मक शिक्षण पहल है। कुलपति डॉ. प्रशांत बोकारे की वैज्ञानिक सोच एवं प्रेरणा से विद्यार्थियों को आधुनिक खगोलीय उपकरणों के माध्यम से ब्रह्मांड का प्रत्यक्ष अध्ययन करने का अवसर मिला।

इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को केवल ग्रहों और तारों को देखने का अवसर ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें ब्रह्मांड से जुड़े कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सवालों पर विचार करने के लिए भी प्रेरित किया—ब्रह्मांड की उत्पत्ति कैसे हुई? तारे और ग्रह किस तरह विकसित होते हैं? और पृथ्वी के बाहर जीवन की संभावना आखिर कहां हो सकती है?

ऐसे अभिनव और अनुभवाधारित कार्यक्रमों के माध्यम से गोंडवाना विश्वविद्यालय, गडचिरोली विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान की प्रवृत्ति, खगोल विज्ञान के प्रति रुचि तथा अंतरिक्ष अनुसंधान के प्रति जिज्ञासा विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज़..

 

 

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