गडचिरौली पुलिस का बड़ा पुनर्वास अभियान: 50 आत्मसमर्पित माओवादियों को उनके मूल जिलों के लिए सुरक्षित रवाना किया

जिले में अब एक भी सशस्त्र माओवादी नहीं; अब तक 819 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

गडचिरौली ब्युरो : गडचिरौली जिले में माओवादी विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। जिले में अब पुलिस के अभिलेखों के अनुसार एक भी सशस्त्र माओवादी शेष नहीं है। इसी क्रम में गडचिरौली पुलिस की ओर से आत्मसमर्पण कर चुके 50 माओवादी सदस्यों को उनके मूल जिलों में सुरक्षित पुनर्वास के लिए रवाना किया गया। इन आत्मसमर्पित माओवादियों के लिए 31 अगस्त 2026 को विदाई समारोह का आयोजन किया गया।

गडचिरौली पुलिस के प्रभावी माओवादी विरोधी अभियानों के साथ-साथ वर्ष 2005 से लागू आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा है। हिंसा का रास्ता छोड़कर कई माओवादी सदस्यों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी सदस्यों के पुनर्वास की प्रक्रिया के चलते अब तक कुल 819 माओवादियों ने गडचिरौली पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है।

मूल जिलों में सुरक्षित पुनर्वास

पिछले कुछ महीनों से पुनर्वास प्रक्रिया के तहत रह रहे 50 आत्मसमर्पित माओवादी सदस्यों को सोमवार को उनके मूल जिलों के लिए सुरक्षित रवाना किया गया। आत्मसमर्पण के बाद उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए केंद्र और महाराष्ट्र सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

इनमें आर्थिक सहायता, आवश्यक सरकारी एवं कानूनी दस्तावेज तैयार कराने में मदद, रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर तथा कौशल विकास प्रशिक्षण शामिल हैं।

‘प्रोजेक्ट संजीवनी’ से नई जिंदगी की शुरुआत

गडचिरौली पुलिस के प्रोजेक्ट संजीवनी के माध्यम से आत्मसमर्पित माओवादी सदस्यों के पुनर्वास को केवल सरकारी प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं रखा गया। उन्हें नई पहचान, आत्मविश्वास, कौशल और सम्मान के साथ सामान्य जीवन जीने का अवसर देने पर विशेष जोर दिया गया।

उनके स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। ‘ऑपरेशन रोशनी’ के तहत नेत्र उपचार शिविर आयोजित किए गए। इसके अलावा आवश्यक शल्यक्रियाएं, मानसिक स्वास्थ्य के लिए परामर्श, सामाजिक समावेशन, आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए ध्यान एवं योग शिविर भी आयोजित किए गए।

46 माओवादी दंपतियों का कराया सामूहिक विवाह

प्रोजेक्ट संजीवनी के तहत अब तक 46 आत्मसमर्पित माओवादी दंपतियों के विवाह सामूहिक विवाह समारोह के माध्यम से कराए गए हैं। वहीं 88 आत्मसमर्पित माओवादी सदस्यों को लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड कंपनी में कौशल विकास प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराया गया है।

‘आत्मनिर्भर बनें और सम्मान के साथ जीवन जिएं’

कार्यक्रम में गडचिरौली के पुलिस अधीक्षक एम. रमेश ने कहा कि प्रोजेक्ट संजीवनी के माध्यम से आत्मसमर्पित सदस्यों को अब तक विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने आत्मसमर्पित माओवादी सदस्यों से अपने कौशल का उपयोग कर आत्मनिर्भर बनने, परिवार के साथ सुरक्षित एवं सुखी जीवन जीने और समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पित सदस्यों के सर्वांगीण विकास के लिए गडचिरौली पुलिस दल प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम में आत्मसमर्पित माओवादी सदस्यों ने भी अपने अनुभव साझा किए और पुलिस दल द्वारा समय-समय पर किए गए सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में पुलिस अधीक्षक एम. रमेश, अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान) कार्तिक मधिरा, सहायक पुलिस अधीक्षक धानोरा सुयश कुमार सिंह, सहायक पुलिस अधीक्षक भामरागड़ सागर भामरे तथा पुलिस उपअधीक्षक (अभियान) सुनील उईके के मार्गदर्शन में आत्मसमर्पण शाखा गडचिरौली के प्रभारी अधिकारी पुलिस उपनिरीक्षक नरेंद्र पिवाल एवं पुलिस कर्मचारियों ने अथक परिश्रम किया।

ब्युरो रिपोर्ट सिंदूर न्युज..

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