सर्पदंश को ‘अधिसूचित बीमारी’ घोषित, हर मामले की होगी अनिवार्य रिपोर्टिंग

मुंबई, 19 अगस्त: राज्य में सर्पदंश से होने वाली मौतों और विकलांगता को रोकने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सर्पदंश को अब ‘अधिसूचित बीमारी’ घोषित किया गया है।

इस निर्णय के बाद राज्य के सभी सरकारी एवं निजी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा व्यवसायियों के लिए सर्पदंश के प्रत्येक संदिग्ध, संभावित या पुष्ट मामले के साथ-साथ सर्पदंश से होने वाली मौत की जानकारी संबंधित स्वास्थ्य प्राधिकरण को देना अनिवार्य होगा।

स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा कि इस फैसले से सर्पदंश की घटनाओं की प्रभावी निगरानी, समय पर उपचार और सर्पविषरोधी दवा (ASV) की उपलब्धता का बेहतर नियोजन किया जा सकेगा।

हर सर्पदंश की होगी तत्काल रिपोर्टिंग

राज्य की प्रत्येक स्वास्थ्य संस्था और चिकित्सा व्यवसायी को उनके संज्ञान में आने वाले या उपचाराधीन सर्पदंश के मामलों की जानकारी जिला स्वास्थ्य अधिकारी या जिला शल्यचिकित्सक को देनी होगी। गंभीर एवं जानलेवा मामलों तथा सर्पदंश से हुई मौत की सूचना उपलब्ध संचार माध्यमों के जरिए तत्काल देना अनिवार्य होगा।

मामलों की जानकारी HMIS/DHIS-2, एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) अथवा सरकार द्वारा निर्धारित अन्य रिपोर्टिंग प्रणाली में दर्ज की जाएगी। इससे राज्य में सर्पदंश से जुड़े मामलों का अद्यतन और विश्वसनीय डेटा उपलब्ध होगा।

राज्य से जिला स्तर तक नोडल अधिकारी

सर्पदंश की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राज्य स्तर पर संचालक (अस्पताल), जबकि जिला स्तर पर जिला शल्यचिकित्सक और जिला स्वास्थ्य अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। महानगरपालिका क्षेत्रों में चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी या अतिरिक्त चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी जाएगी।

ASV के स्टॉक पर भी रहेगी नजर

सर्पदंश का उपचार करने वाली प्रत्येक स्वास्थ्य संस्था को ASV की उपलब्धता, प्राप्ति, उपयोग और शेष स्टॉक का अद्यतन रिकॉर्ड रखना होगा। जरूरत पड़ने पर यह जानकारी जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण को उपलब्ध करानी होगी। इससे सर्पदंश के अधिक मामलों वाले क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में ASV उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत होगी।

मरीज के उपचार की पूरी जानकारी दर्ज होगी

सर्पदंश के मरीज के रिकॉर्ड में दंश की तारीख और स्थान, मरीज की उम्र एवं लिंग, सर्पदंश की परिस्थितियां, विषबाधा के लक्षण, किए गए उपचार, दी गई ASV की शीशियों की संख्या, रेफर किए जाने की स्थिति, उपचार का परिणाम और मृत्यु होने पर उसकी जानकारी दर्ज करना आवश्यक होगा।

घटनाओं के कारणों का होगा अध्ययन

सर्पदंश की घटनाओं और मौतों की नियमित निगरानी के साथ घटनास्थल, परिस्थितियों, मौसम और अन्य संबंधित कारकों का अध्ययन किया जाएगा। इसके आधार पर स्थानीय स्तर पर सर्पदंश की रोकथाम के लिए प्रभावी उपाय तैयार किए जाएंगे।

जिला स्वास्थ्य प्राधिकरणों को सर्पदंश से बचाव, तत्काल रिपोर्टिंग, प्राथमिक उपचार, समय पर रेफरल और उचित उपचार को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाने की जिम्मेदारी भी दी गई है।

‘समय पर उपचार ही जीवन बचाने का मंत्र’

स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा कि सर्पदंश के मरीज को समय पर उचित उपचार मिलना जीवन बचाने का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। सरकार का जोर सर्पदंश के हर मामले की रिपोर्टिंग, पर्याप्त ASV स्टॉक, विशेषज्ञ उपचार के लिए तत्काल रेफरल और प्रभावी निगरानी पर है। उन्होंने संदेश दिया—“सर्पदंश की हर घटना दर्ज करें, समय पर उपचार दें और अनमोल जीवन बचाएं।”

सर्पदंश के उपचार और प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार, महाराष्ट्र सरकार अथवा सक्षम प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर जारी उपचार संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज…

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