स्कूल का समय शाम 5 बजे तक, लेकिन 4:27 बजे ही लगा ताला!

साल्हे जि.प. प्राथमिक स्कूल में समय से पहले स्कूल बंद होने का आरोप; शिक्षकों की उपस्थिति और हाजिरी रजिस्टर की जांच की मांग

गढचिरौली/कोरची : विद्यार्थियों को निर्धारित समय तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से लगातार विभिन्न योजनाएं और उपाय किए जा रहे हैं। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की जिला परिषद स्कूलों में व्यवस्था और निगरानी को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसा ही एक मामला गडचिरोली जिले के कोरची तहसील के साल्हे गांव में सामने आया है, जहां स्कूल का निर्धारित समय शाम 5 बजे तक होने के बावजूद शाम 4 बजकर 27 मिनट पर ही स्कूल के मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला लगा हुआ दिखाई दिया। इस मामले के बाद स्कूल में शिक्षकों की उपस्थिति और निर्धारित समय से पहले स्कूल बंद किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, साल्हे नंबर 2 स्थित जिला परिषद प्राथमिक स्कूल का निर्धारित समय शाम 5 बजे तक बताया जा रहा है। हालांकि, सोमवार 21 सितंबर 2026 को शाम करीब 4:27 बजे स्कूल के मुख्य दरवाजे पर ताला लगा हुआ दिखाई दिया। इस संबंध में सामने आए फोटो में GPS मैप कैमरे के माध्यम से साल्हे गांव का स्थान और शाम 4:27 बजे का समय भी दर्ज दिखाई दे रहा है।

निर्धारित समय से 33 मिनट पहले बंद हुआ स्कूल?

यदि स्कूल का निर्धारित समय शाम 5 बजे तक है और शाम 4:27 बजे स्कूल बंद पाया गया, तो स्कूल के निर्धारित समय से करीब 33 मिनट पहले ही स्कूल बंद होने का सवाल उठता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि उस समय स्कूल में शिक्षक और कर्मचारी मौजूद थे या नहीं और यदि मौजूद नहीं थे, तो वे किस समय स्कूल से रवाना हुए?

हालांकि, केवल तस्वीर के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि शिक्षक वास्तव में कितने बजे स्कूल से निकले। इसलिए पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा संबंधित रिकॉर्ड और मौके की जांच करना जरूरी है।

विद्यार्थियों के शैक्षणिक समय का क्या?

स्कूल में निर्धारित समय विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए तय किया जाता है। ऐसे में यदि किसी कारणवश स्कूल निर्धारित समय से पहले बंद होता है, तो विद्यार्थियों के शैक्षणिक समय पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में पहले से ही शिक्षा व्यवस्था को लेकर अनेक चुनौतियां सामने आती रही हैं। ऐसे में स्कूल के निर्धारित समय और वास्तविक रूप से स्कूल बंद होने के समय में अंतर पाए जाने पर विभागीय स्तर पर इसकी जांच आवश्यक हो जाती है।

हाजिरी रजिस्टर और उपस्थिति की जांच की मांग

इस मामले को लेकर अभिभावकों और ग्रामीणों की ओर से शिक्षा विभाग से जांच की मांग की जा रही है। मांग है कि संबंधित दिन की शिक्षकों की हाजिरी, उपस्थिति रजिस्टर, विद्यार्थियों की उपस्थिति तथा स्कूल बंद किए जाने के वास्तविक समय की जांच की जाए।

साथ ही यह भी देखा जाए कि संबंधित दिन स्कूल में कितने शिक्षक उपस्थित थे और उन्होंने स्कूल परिसर कब छोड़ा। यदि जांच में निर्धारित नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ऐसी मांग ग्रामीणों की ओर से की जा रही है।

शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल

ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों की नियमित निगरानी और शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित शिक्षा अधिकारियों की होती है। ऐसे में यदि किसी स्कूल में निर्धारित समय से पहले ताला लगा हुआ पाया जाता है, तो शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

इस मामले में शिक्षा विभाग की ओर से मौके की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना महत्वपूर्ण होगा। क्या उस दिन स्कूल में नियमित कक्षाएं चल रही थीं? क्या शिक्षक निर्धारित समय तक स्कूल में मौजूद थे? स्कूल किस समय बंद किया गया? इन सभी सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

मंत्री के दौरे के बाद भी ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

हाल ही में शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने गडचिरोली जिले का दौरा किया था। इस दौरान जिले के ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी चर्चा हुई थी। इसके बावजूद यदि किसी ग्रामीण क्षेत्र की जिला परिषद स्कूल में निर्धारित समय से पहले स्कूल बंद होने का मामला सामने आता है, तो जमीनी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था की निगरानी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों की तरह निर्धारित समय तक शिक्षा और आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं मिलना जरूरी है। इसलिए साल्हे स्कूल के इस मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की जा रही है।

अब शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर नजर

साल्हे की जिला परिषद प्राथमिक स्कूल में शाम 4:27 बजे ताला लगा होने की तस्वीर सामने आने के बाद अब शिक्षा विभाग इस मामले को किस तरह देखता है, यह महत्वपूर्ण होगा। क्या विभाग संबंधित स्कूल की हाजिरी और उपस्थिति रजिस्टर की जांच करेगा? क्या स्कूल बंद करने के वास्तविक समय की पुष्टि की जाएगी? और यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो क्या संबंधितों पर कार्रवाई होगी?

फिलहाल “जब स्कूल का निर्धारित समय शाम 5 बजे तक है, तो 4:27 बजे ही स्कूल पर ताला क्यों लगा?” यह सवाल अभिभावकों और ग्रामीणों की ओर से उठाया जा रहा है। अब इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की जांच और आधिकारिक कार्रवाई का इंतजार है।

ब्युरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज..

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