सफर सस्ता, लेकिन सुविधा महंगी! NCMC कार्ड की अनिवार्यता से ग्रामीण महिलाओं की बढ़ी परेशानी

पहले आसानी से मिलता था रियायती टिकट, अब कार्ड बनवाने से लेकर रिचार्ज तक का झंझट; दुर्गम गांवों की महिलाओं के सामने नई मुश्किल

गढचिरौली/कोरची : महिलाओं को रियायती दर पर एसटी बसों में यात्रा की सुविधा देना सरकार का स्वागत योग्य निर्णय है, लेकिन इस सुविधा का लाभ लेने की प्रक्रिया ही अगर ग्रामीण महिलाओं के लिए परेशानी का कारण बन जाए तो सवाल उठना स्वाभाविक है। महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम द्वारा 1 सितंबर 2026 से महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के रियायती टिकट के लिए NCMC कार्ड के इस्तेमाल को अनिवार्य किए जाने से ग्रामीण क्षेत्रों की महिला यात्रियों में नाराजगी दिखाई दे रही है।

अब तक महिलाओं को बस में यात्रा करते समय सामान्य प्रक्रिया के तहत रियायती टिकट मिल जाता था। इसके लिए उन्हें न कोई कार्ड बनवाना पड़ता था और न ही रिचार्ज या डिजिटल प्रक्रिया की चिंता करनी पड़ती थी। लेकिन नई व्यवस्था में NCMC कार्ड बनवाना, उसे सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर उसमें राशि उपलब्ध रखना महिलाओं के लिए जरूरी हो गया है।

दुर्गम गांवों में असली परेशानी यहीं से शुरू होती है। कोरची तहसील के अनेक गांवों की महिलाएं तहसील या जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए पहले ही लंबी दूरी तय करती हैं। ऐसे में केवल NCMC कार्ड बनवाने के लिए बस स्टैंड या संबंधित केंद्र तक जाना उनके लिए अतिरिक्त समय और खर्च का कारण बन सकता है।

ग्रामीण क्षेत्र की अनेक महिलाओं को डिजिटल लेन-देन, कार्ड रिचार्ज और कार्ड से जुड़ी तकनीकी प्रक्रिया की पर्याप्त जानकारी नहीं है। यदि कार्ड खो गया, खराब हो गया या तकनीकी कारणों से काम नहीं किया तो रियायती यात्रा का लाभ लेने में भी परेशानी खड़ी हो सकती है।

छूट चाहिए, लेकिन झंझट नहीं

ग्रामीण महिला यात्रियों का कहना है कि सरकार महिलाओं को यात्रा में राहत देना चाहती है तो यह सुविधा ऐसी होनी चाहिए, जिसका लाभ गांव की सामान्य महिला भी बिना किसी तकनीकी परेशानी के उठा सके। उनका कहना है कि “छूट का लाभ लेने के लिए पहले कार्ड बनवाने और उसकी तकनीकी प्रक्रिया से गुजरने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए।”

महिलाओं की मांग है कि NCMC कार्ड की अनिवार्यता पर पुनर्विचार किया जाए और कम से कम ग्रामीण तथा दुर्गम क्षेत्रों में पहले की तरह सरल तरीके से रियायती टिकट उपलब्ध कराया जाए। यदि कार्ड व्यवस्था लागू रखी जाती है तो गांव स्तर पर कार्ड बनाने, रिचार्ज करने और तकनीकी समस्या दूर करने की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी जोर पकड़ रही है।

आदेश जारी, अब जमीनी हकीकत पर नजर

गडचिरोली आगार प्रबंधक के आदेशानुसार NCMC कार्ड के माध्यम से रियायती टिकट वितरित करने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। अब इस व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में होगी। कागज पर सुविधा भले ही डिजिटल और आधुनिक दिखाई दे, लेकिन दूरदराज के गांवों में रहने वाली महिलाओं के लिए यह सुविधा कितनी आसान है, इसका जवाब जमीनी स्तर पर ही मिलेगा।

महिलाओं को रियायत देने का उद्देश्य उनकी यात्रा को आसान बनाना है। इसलिए ग्रामीण महिलाओं का सवाल है कि अगर रियायत पाने के लिए ही अतिरिक्त दौड़-धूप करनी पड़े, तो फिर यह सुविधा कितनी सुविधाजनक है?

ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज़..

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