गढ़चिरौली,ब्यूरो : कोरची तहसील के कोटगुल पुलिस सहायता केंद्र के अंतर्गत नांगपुर के घने जंगल में चल रहे कथित ताश क्लब पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई के बाद अब इस पूरे मामले के पीछे के नेटवर्क को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। पुलिस ने रात के अंधेरे में घने जंगल में पहुंचकर कार्रवाई की और करीब 1 करोड़ 50 लाख 97 हजार रुपये की नकदी, गाड़ियां तथा अन्य सामग्री 16 अगस्त के रात जब्त किए है।
इस कार्रवाई के बाद अब चर्चा केवल ताश क्लब तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कथित रूप से जुड़े लोगों और पूरे नेटवर्क को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच कांग्रेस पार्टी के जिला महासचिव परमेश्वर लोहंबरे का नाम नांगपुर ताश क्लब के कथित मुख्य सूत्रधार के रूप में चर्चा में आ रहा है। हालांकि, क्लब के संचालन में उनकी भूमिका को लेकर पुलिस की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
पैसों के कथित खेल के पीछे कौन?
पुलिस द्वारा जब्त की गई करीब डेढ़ करोड़ रुपये की रकम ने इस कथित ताश क्लब के कारोबार के आकार को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जंगल के भीतर इतनी बड़ी रकम के साथ कथित जुआ गतिविधि चल रही थी तो इसके पीछे कौन-कौन लोग थे, पैसा किसका था और इस पूरे नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था—इन सवालों के जवाब अब पुलिस जांच में सामने आने बाकी हैं।
चर्चा यह भी है कि इस क्लब से जुड़े कथित लोगों में पत्रकार और वकील की चर्चा भी सामने आ रहा है। हालांकि, इन दोनों के क्लब में पार्टनर होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि जांच में इनकी भूमिका सामने आती है, तो उनकी भी भूमिका और कथित आर्थिक संबंधों की जांच होना जरूरी होगा।
पत्रकार और वकील क्यों चर्चा में?
लोकतंत्र में पत्रकार को चौथा स्तंभ माना जाता है और आम नागरिक न्याय के लिए वकील का सहारा लेता है। ऐसे में यदि जांच के दौरान किसी पत्रकार या वकील की किसी अवैध गतिविधि में भूमिका प्रमाणित होती है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई होगी?
जनता के बीच यही चर्चा है कि अवैध गतिविधियों को किसी भी व्यक्ति का पद, पेशा या राजनीतिक पहचान संरक्षण नहीं दे सकती। यदि जांच में कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।
रात 2 बजे घने जंगल में पुलिस की बड़ी कार्रवाई
नांगपुर का इलाका घने जंगल में होने के कारण रात के समय पुलिस के लिए कार्रवाई करना आसान नहीं था। इसके बावजूद पुलिस टीम ने रात करीब 2 बजे जंगल में पहुंचकर कार्रवाई की। अंधेरे और कठिन परिस्थितियों में की गई इस कार्रवाई को पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
पुलिस ने मौके से बड़ी मात्रा में नकदी के साथ वाहन और अन्य सामग्री जब्त की। अब इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी रकम और कथित जुआ क्लब का नेटवर्क आखिर किसके इशारे पर चल रहा था?
परमेश्वर लोहंबरे मौके पर क्यों नहीं मिले?
इस पूरे मामले में कांग्रेस जिला महासचिव परमेश्वर लोहंबरे का नाम कथित मुख्य सूत्रधार के तौर पर चर्चा में आने के बाद एक और सवाल खड़ा हो रहा है—अगर वे वास्तव में इस क्लब के संचालन से जुड़े थे, तो पुलिस की कार्रवाई के दौरान वे मौके पर क्यों नहीं मिले?
क्या पुलिस कार्रवाई की जानकारी पहले ही कुछ लोगों तक पहुंच गई थी? क्या कार्रवाई से पहले ही प्रमुख लोग वहां से निकल गए थे? या फिर उनके मौके पर मौजूद नहीं होने की कोई दूसरी वजह थी? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
मिथुन तांबेकर भी फरार कैसे हुआ?
इसी तरह मिथुन तांबेकर के भी पुलिस कार्रवाई के दौरान मौके पर नहीं मिलने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद कथित तौर पर क्लब से जुड़े प्रमुख लोगों का पुलिस के हाथ नहीं लगना जांच का महत्वपूर्ण बिंदु हो सकता है।
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि नांगपुर ताश क्लब के मुख्य कथित सूत्रधार फरार हुए या उन्हें फरार होने का मौका दिया गया?
यदि पुलिस को इस पूरे नेटवर्क के बारे में पहले से जानकारी थी, तो कार्रवाई के दौरान प्रमुख लोगों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो सकी? क्या पुलिस अब फरार बताए जा रहे लोगों तक पहुंचेगी? और क्या इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी जांच में सामने आएंगे?
कार्रवाई के बाद खुलने लगा कथित नेटवर्क का काला सच
नांगपुर ताश क्लब पर हुई कार्रवाई ने कथित अवैध जुआ कारोबार के पीछे मौजूद नेटवर्क को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब डेढ़ करोड़ रुपये की नकदी की जब्ती कोई सामान्य मामला नहीं माना जा सकता। ऐसे में सिर्फ क्लब पर कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इस पूरे नेटवर्क को आर्थिक और संगठित स्तर पर खंगालना भी जरूरी होगा।
कौन पैसा लगा रहा था? क्लब का संचालन कौन कर रहा था? कथित पार्टनर कौन थे? इतनी बड़ी रकम वहां कैसे पहुंची? स्थानीय स्तर पर किसका संरक्षण था? और क्या किसी राजनीतिक, सामाजिक या पेशेवर प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका थी? इन तमाम सवालों के जवाब पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएंगे।
फिलहाल परमेश्वर लोहंबरे को नांगपुर ताश क्लब का कथित मुख्य सूत्रधार बताए जाने तथा पत्रकार और वकील के कथित पार्टनर होने की चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन सभी दावों की सत्यता पुलिस जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही तय होगी।
ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज़…