जिस हाथ में कभी बंदूक थी, उसी हाथ ने बांधी राखी; गडचिरौली में बदली माओवादी महिलाओं की कहानी

गडचिरौली,ब्यूरो 29 अगस्त। कभी जंगल में बंदूक उठाने वालीं आत्मसमर्पित महिला माओवादी सदस्यों के हाथ शुक्रवार को राखी से सजे नजर आए। गडचिरौली के नवजीवन वसाहत में रक्षाबंधन के मौके पर एक ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जहां आत्मसमर्पित 70 महिला माओवादी सदस्यों ने पुलिस अधिकारियों और सी-60 जवानों को राखी बांधकर भाईचारे का संदेश दिया।

गडचिरौली पुलिस के ‘प्रोजेक्ट संजीवनी’ के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक एम. रमेश सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने नवजीवन वसाहत पहुंचकर आत्मसमर्पित महिला माओवादी सदस्यों के साथ रक्षाबंधन मनाया। महिलाओं ने अधिकारियों और जवानों को राखी बांधी, वहीं महिला पुलिस अधिकारियों ने भी आत्मसमर्पित महिलाओं को राखी बांधकर इस रिश्ते को नई पहचान दी।

पुलिस अधीक्षक एम. रमेश ने आत्मसमर्पित महिलाओं को उपहार भेंट किए और उनसे सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं जानीं। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पित माओवादी सदस्य समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ जीवन जी सकें, इसके लिए गडचिरौली पुलिस हरसंभव सहयोग कर रही है।

819 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

गडचिरौली पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण योजना-2005 के माध्यम से अब तक 819 माओवादी पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर चुके हैं। पुलिस द्वारा आत्मसमर्पित सदस्यों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं।

पुलिस थानों में भी गूंजा भाई-बहन के रिश्ते का संदेश

रक्षाबंधन के अवसर पर पुलिस अधीक्षक एम. रमेश के साथ अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान) कार्तिक मधिरा, अपर पुलिस अधीक्षक अहेरी हर्षवर्धन बी. जे. और सहायक पुलिस अधीक्षक अनिकेत हिरडे ने पुलिस स्टेशन गडचिरौली, चातगांव और पुलिस मदद केंद्र गोडलवाही का दौरा किया। यहां महिला पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों और स्कूली छात्राओं के साथ रक्षाबंधन मनाया गया।

वहीं गडचिरौली जैसे संवेदनशील क्षेत्र में तैनात पुलिस जवानों के लिए मुंबई के श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकर्सी महिला विश्वविद्यालय, पुणे के भरारी प्रतिष्ठान और मुंबई के विभिन्न स्कूलों की छात्राओं ने राखियां भेजीं। छात्राओं ने राखी के जरिए जवानों के प्रति सम्मान और शुभकामनाएं व्यक्त कीं।

इस पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे लोगों और पुलिस के बीच अब बंदूक का नहीं, बल्कि विश्वास और भाईचारे का रिश्ता मजबूत हो रहा है।

ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज़..

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