कोरची में गोवंश तस्करी का खेल? बोरी गांव में तीन नामों की चर्चा

छत्तीसगढ़ सीमा से महज एक कि.मी. दूर होने का फायदा; राजू, वसीम और अरबाज के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज, वाहन पकड़े जाने और गोवंश मुक्त कराए जाने के बावजूद कारोबार जारी.

गढ़चिरौली, ब्यूरो : जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ पुलिस प्रशासन की कार्रवाई लगातार तेज होती दिखाई दे रही है। पुलिस अधीक्षक एम. रमेश के निर्देश पर जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। कुरखेड़ा तहसील के गोवर्धा क्षेत्र में कथित गोवंश तस्करी के खिलाफ स्थानीय अपराध शाखा यानी एलसीबी की कार्रवाई के बाद अब कोरची तहसील के बोरी गांव में गोवंश तस्करी को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।

बोरी गांव में राजू, वसीम और अरबाज नाम के तीन लोगों के गोवंश तस्करी से जुड़े होने की चर्चा सामने आ रही है। खास बात यह है कि यह मामला केवल स्थानीय चर्चाओं तक सीमित नहीं है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इन लोगों के खिलाफ कोटगुल, बेलगांव और कुरखेड़ा पुलिस थानों में पहले भी गोवंश तस्करी से संबंधित मामले दर्ज हो चुके हैं। तस्करी के दौरान इस्तेमाल किए गए वाहन पुलिस द्वारा पकड़े जाने और वाहनों से गोवंश बरामद होने की कार्रवाई भी पहले हो चुकी है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान कई बेजुबान जानवरों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर आरोप है कि यह गतिविधियां दोबारा शुरू हो जाती हैं।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, बोरी गांव और आसपास के क्षेत्र में यह कारोबार लंबे समय से सक्रिय बताया जाता है और पिछले करीब 20 वर्षों से राजू, वसीम और अरबाज के नाम इस गतिविधि से जोड़े जाते रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जाता है कि दबदबे और कथित गुंडागिरी के सहारे यह कारोबार चलाया जाता रहा है।

सीमा से नजदीकी बनी चिंता का कारण

बोरी गांव की भौगोलिक स्थिति इस पूरे मामले को गंभीर बनाती है। स्थानीय जानकारी के मुताबिक, बोरी गांव से छत्तीसगढ़ की सीमा लगभग एक कि.मी. की दूरी पर है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यहां से होने वाली वाहनों की आवाजाही पर निगरानी रखना पुलिस के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ की तरफ से गोवंश को अवैध तरीके से बोरी क्षेत्र में लाया जाता है। इसके बाद रात के समय पिकअप, माजदा और अन्य मालवाहक वाहनों में गोवंश भरकर दूसरे क्षेत्रों की ओर ले जाने की चर्चा है। आरोप यह भी है कि इन वाहनों के माध्यम से गोवंश को बड़े शहरों के कत्तलखानों तक पहुंचाया जाता है।

पहले भी पुलिस ने पकड़े हैं वाहन और मुक्त कराया गोवंश

कोरची, बेलगांव और अन्य संबंधित पुलिस क्षेत्रों में गोवंश के अवैध परिवहन के खिलाफ पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। कार्रवाई के दौरान वाहनों को पकड़ा गया और उनमें ले जाए जा रहे गोवंश को पुलिस ने मुक्त कराया।

इसके अलावा राजू, वसीम और अरबाज के खिलाफ अलग-अलग पुलिस थानों में मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में सवाल यह है कि जब पुलिस पहले ही इन लोगों से जुड़े मामलों में कार्रवाई कर चुकी है और तस्करी में इस्तेमाल वाहनों तक को पकड़ा जा चुका है, तो इसके बावजूद कथित तौर पर यह नेटवर्क दोबारा कैसे सक्रिय हो रहा है?

गोवर्धा की कार्रवाई के बाद बोरी पर नजर

कुरखेड़ा तहसील के गोवर्धा क्षेत्र में कथित गोवंश तस्करी के मामले में (LCB) द्वारा दो बार कार्रवाई किए जाने और करीब 40 लाख रुपये के माल की जब्ती हुई थी। इस कार्रवाई के बाद अब सीमावर्ती कोरची तहसील के बोरी गांव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

जिले में पुलिस द्वारा अवैध कारोबार के खिलाफ सख्ती दिखाई जा रही है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बोरी गांव और छत्तीसगढ़ सीमा से लगे आसपास के इलाकों में भी विशेष निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।

रात के समय वाहनों की जांच जरूरी

स्थानीय नागरिकों के अनुसार यदि रात के समय पिकअप, माजदा या अन्य मालवाहक वाहनों के जरिए गोवंश ले जाने की गतिविधियां हो रही हैं, तो पुलिस को सीमावर्ती मार्गों पर विशेष नाकाबंदी, वाहनों की जांच और संदिग्ध वाहनों की निगरानी बढ़ानी चाहिए।

साथ ही यह भी पता लगाया जाना जरूरी है कि गोवंश कहां से लाया जाता है, किन रास्तों से बोरी तक पहुंचाया जाता है, किन लोगों की इसमें भूमिका है और तस्करी के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहनों के मालिकों तथा चालकों का इस पूरे नेटवर्क से क्या संबंध है।

मामले दर्ज होने के बावजूद कारोबार पर रोक क्यों नहीं?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब राजू, वसीम और अरबाज के खिलाफ पहले से पुलिस थानों में मामले दर्ज हैं, वाहन पकड़े जा चुके हैं और तस्करी के दौरान गोवंश को पुलिस ने मुक्त भी कराया है, तो फिर कथित तौर पर यह गतिविधियां दोबारा कैसे शुरू हो रही हैं?

अगर पिछले कई वर्षों से यह नेटवर्क सक्रिय है तो इसकी जड़ें कितनी गहरी हैं और इसके पीछे सिर्फ कुछ लोग हैं या फिर इससे जुड़े लोगों का कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है—यह जांच का महत्वपूर्ण विषय है।

तीन नाम, कई मामले और फिर भी सक्रियता की चर्चा

बोरी गांव में राजू, वसीम और अरबाज के नाम को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा लंबे समय से होने की बात कही जा रही है। वहीं, इनके खिलाफ पहले दर्ज पुलिस मामलों और की गई कार्रवाई की जानकारी इस मामले को और गंभीर बनाती है।

पुलिस द्वारा पहले कार्रवाई किए जाने के बावजूद यदि वही लोग दोबारा कथित रूप से सक्रिय होते हैं, तो यह सवाल भी उठता है कि क्या कार्रवाई केवल वाहन और गोवंश की जब्ती तक सीमित रह गई है, या फिर पूरे नेटवर्क के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है?

अब सवाल पुलिस से—कब रुकेगा यह कथित कारोबार?

गढ़चिरौली जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ पुलिस प्रशासन की सख्ती के बीच अब लोगों की नजर कोरची के बोरी गांव पर है। स्थानीय नागरिकों की मांग है कि पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे सीमावर्ती क्षेत्र की निगरानी बढ़ाए और पहले से दर्ज मामलों तथा पूर्व की कार्रवाई को आधार बनाकर कथित नेटवर्क की पूरी पड़ताल करे।

मामले दर्ज हैं, वाहन पकड़े जा चुके हैं, गोवंश मुक्त कराया जा चुका है—फिर भी अगर गतिविधियां दोबारा शुरू हो रही हैं तो आखिर यह कारोबार चलाने वालों पर स्थायी रोक कब लगेगी?

बोरी गांव छत्तीसगढ़ सीमा से महज एक कि.मी. दूर है। ऐसे में सीमा क्षेत्र की निगरानी, रात के समय वाहनों की जांच और पहले से दर्ज मामलों की कड़ियों को जोड़कर कार्रवाई करना बेहद जरूरी माना जा रहा है। अब देखना होगा कि बोरी गांव में चल रही गोवंश तस्करी की चर्चाओं और पहले दर्ज मामलों के आधार पर पुलिस आगे क्या कार्रवाई करती है।

ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज़..

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