कोरची के गहाणेगाटा जंगल में पुलिस की बड़ी रेड; 31 लोग हिरासत में, 1.34 करोड़ रुपये का मुद्देमाल जब्त
गडचिरोली,ब्यूरो : गडचिरोली जिले के कोरची तहसील के जंगलों में कथित तौर पर लंबे समय से चल रहे ताश के क्लबों को लेकर आखिरकार पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मसेली के कोल्हाटोला से लेकर बोटेकसा-मर्केकसा,नांगपूर, बोरी और अब गहाणेगाटा जंगल तक ताश के क्लबों को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। कहीं लाखों-करोड़ों रुपये की बाजी लगने की बात सामने आती रही, तो कहीं महंगी BMW, Mercedes और Audi जैसी कारों से खिलाड़ियों के पहुंचने की चर्चा रही। क्लब संचालकों के बीच पैसों के हिसाब को लेकर विवाद और गुटबाजी की बातें भी सामने आती रही हैं। लेकिन अब गहाणेगाटा जंगल में पुलिस की बड़ी कार्रवाई ने इस कथित ताश क्लब के खेल पर बड़ा ब्रेक लगा दिया है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 31 लोगों को हिरासत में लिया और चारपहिया-दोपहिया वाहनों समेत करीब 1 करोड़ 34 लाख 14 हजार 10 रुपये का मुद्देमाल जब्त किया है।
मसेली के कोल्हाटोला से शुरू हुई ताश क्लब की चर्चा
कोरची तहसील में जंगल के भीतर ताश क्लब चलने की चर्चा कोई नई नहीं है। करीब एक साल पहले मसेली के कोल्हाटोला जंगल क्षेत्र में कथित तौर पर चलने वाले ताश क्लब की काफी चर्चा थी। स्थानीय जानकारी के मुताबिक यहां ताश खेलने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते थे। बड़े पैसों की बाजी लगने की चर्चाओं के बीच यह भी कहा जाता था कि यहां BMW, Mercedes और Audi जैसी महंगी कारों से लोग ताश खेलने पहुंचते थे।
जंगल के भीतर चलने वाले इन कथित क्लबों को लेकर स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी थी कि यहां सामान्य जुआरियों के बजाय बड़े पैसों वाले खिलाड़ी पहुंचते थे। लेकिन गहाणेगाटा में हुई ताजा पुलिस कार्रवाई में बड़ी संख्या में वाहन और 1.34 करोड़ रुपये से अधिक का मुद्देमाल मिलने के बाद पुराने ताश क्लबों को लेकर चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं।
ताश की बाजी में पैसा खत्म हुआ तो पत्नी को दांव पर लगाने की चर्चा
मसेली के कोल्हाटोला में चलने वाले कथित ताश क्लब को लेकर उस दौर की एक बेहद सनसनीखेज चर्चा आज भी इलाके में सुनाई देती है। बताया जाता है कि ताश खेलते-खेलते एक शख्स ने पहले लाखों रुपये की बाजी लगाई और जब पैसे खत्म हो गए तो अपनी पत्नी को ही दांँव पर लगा दिया। लेकिन किस्मत ने भी उसका साथ नहीं दिया और वह अपनी पत्नी को भी हार गया। इसके बाद कथित तौर पर क्लब संचालकों की ओर से “पैसा दो, नहीं तो पत्नी दो” जैसी दबाव की स्थिति बनने की चर्चा सामने आई। बताया जाता है कि इस घटना की चर्चा कोरची से निकलकर महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों तक पहुंच गई थी। जिस शख्स के पास जुए में लगाने के लिए लाखों रुपये नहीं थे, उससे पैसे वसूलने के लिए कुछ समय तक दबाव बनाए जाने की भी चर्चा रही। बाद में कुछ महीनों के भीतर मामला शांत कराए जाने की बात सामने आई। बताया जाता है कि आखिरकार उस महिला को इस पूरे विवाद से बाहर निकाल लिया गया और उसकी इज्जत बच गई। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया—अगर उस शख्स के पास पैसे नहीं थे और उसने अपनी पत्नी को ही दांँव पर लगा दिया था, तो क्या शराब और जुए के नशे में वह सचमुच अपनी पत्नी को क्लब संचालकों के हवाले कर देता? यह सवाल आज भी इस ताश क्लब की उस सनसनीखेज कहानी को और गंभीर बना देता है।
यह घटना इलाके में लंबे समय तक चर्चा में रही। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुलिस पुष्टि, शिकायत या कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसलिए यह हिस्सा स्थानीय चर्चा के रूप में ही सामने आता है। लेकिन अगर ऐसी घटना की पुष्टि होती है, तो मामला सिर्फ जुए तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिला की सुरक्षा और अन्य संभावित अपराधों के पहलुओं की भी जांच का विषय बन सकता है।
मसेली, बोटेकसा और बोरी के क्लब संचालकों की रात में बैठक
इसके बाद मसेली के साथ बोटेकसा और बोरी क्षेत्र में कथित तौर पर चलने वाले ताश क्लबों को लेकर भी चर्चा सामने आती रही। जानकारी के मुताबिक इन क्लबों से जुड़े लोगों की कोरची के निर्मल टी पॉइंट के पास आठ महीने पहले रात करीब 1 से 2 बजे के बीच बैठक हुई थी।
बताया जाता है कि इसी बैठक के दौरान क्लब चलाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। बात इतनी बढ़ी कि कथित तौर पर क्लब संचालक आपस में हाथापाई पर उतर आए। उसी दौरान बोरी क्षेत्र में ताश क्लब चलाने वाले एक व्यक्ति पर पिस्टल तानने की बात भी सामने आई। रात के समय हुई इस कथित घटना ने इलाके में हलचल पैदा कर दी थी और क्लब संचालकों के बीच चल रहे अंदरूनी विवाद की चर्चा तेज हो गई थी।
विवाद की जानकारी पुर्व एसपी निलोत्पल तक पहुंचने की बात
स्थानीय जानकारी के मुताबिक निर्मल टी-पॉइंट के पास हुए इस विवाद की जानकारी उस समय गडचिरोली के पुलिस अधीक्षक नीलोत्पल तक भी पहुंची थी। बताया जाता है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पुलिस थाना प्रभारियों को अलर्ट रहने और अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए थे।
इसके बाद कुछ समय के लिए जंगलों में चल रहे कथित ताश क्लब बंद रहा। ऐसा लगा कि जंगल के भीतर चलने वाला यह खेल फिलहाल थम गया है। लेकिन कुछ महीने बाद कथित तौर पर फिर से पूरी व्यवस्था खड़ी कर दी गई।
28 लोगों की टीम बनी, लेकिन पैसे के हिसाब ने फिर बिगाड़ा खेल
कुछ महीनों बाद क्लब से जुड़े लोगों और साझेदारों के बीच समझौता हुआ। उसके बाद बोरी के जंगल क्षेत्र में करीब 28 लोगों की टीम बनाकर ताश क्लब चलाने का निर्णय लिया गया।
लेकिन उस बार भी विवाद ज्यादा दिन दूर नहीं रहा। बताया जाता है कि क्लब से होने वाली कमाई और पैसों के हिसाब-किताब को लेकर साझेदारों में फिर विवाद शुरू हो गया। विवाद बढ़ने के बाद पूरी टीम तीन अलग-अलग गुटों में बंट गई।
यानी ताश के खेल के साथ-साथ क्लब चलाने वालों के बीच भी पैसों की बाजी शुरू हो गई थी। उसके बाद अलग-अलग गुटों ने अपने-अपने स्तर पर अलग-अलग जंगल क्षेत्रों में ठिकाने तलाशने शुरू किए। और कुछ दिन तक बोटेकसा और मर्केकसा के बीच ताश क्लब का खेल शुरू करने में हासिल हुए थे।
पुलिस को चकमा देने के लिए रात के अंधेरे में जंगल का ठिकाना
मसेली, बोटेकसा और बोरी से जुड़ी चर्चाओं के बाद गहाणेगाटा जंगल का नाम सामने आया। छत्तीसगढ़ सीमा से सटे इस जंगल क्षेत्र में रात के अंधेरे में ताश क्लब चलाया जाने लगा।
जंगल का दुर्गम इलाका और सीमावर्ती क्षेत्र ऐसे लोगों के लिए सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा, जो पुलिस की नजरों से बचकर गतिविधियां संचालित करना चाहते थे। लेकिन इस बार पुलिस को इसकी जानकारी मिल गई। 18 सितंबर को पुलिस को गहाणेगाटा जंगल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ताश के पत्तों पर पैसे लगाकर जुआ खेले जाने की सूचना मिली।
पुलिस ने बनाया प्लान और गहाणेगाटा में कर दी रेड
सूचना मिलने के बाद बेडगांव पुलिस सहायता केंद्र के प्रभारी पुलिस उपनिरीक्षक दिनेश खोटेले के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई की तैयारी शुरू की। जंगल का इलाका होने के कारण पुलिस ने पूरी तैयारी और नियोजन के साथ कार्रवाई की।
इसके बाद पुलिस टीम गहाणेगाटा जंगल में पहुंची और कथित ताश क्लब पर छापा मार दिया। पुलिस की रेड होते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। 6 लोगों के भागने की जानकारी है, जबकि पुलिस ने मौके से 31 लोगों को हिरासत में लिया।
1.34 करोड़ का माल जब्त
गहाणेगाटा की इस कार्रवाई में पुलिस को सिर्फ ताश खेलने वाले लोग ही नहीं मिले, बल्कि बड़ी संख्या में वाहन और अन्य सामग्री भी बरामद हुई। पुलिस ने चारपहिया और दोपहिया वाहनों के साथ नकदी, मोबाइल फोन तथा जुए से संबंधित सामग्री जब्त की। पूरी कार्रवाई में जब्त मुद्देमाल की कीमत करीब 1 करोड़ 34 लाख 14 हजार 10 रुपये बताई गई है।
इतनी बड़ी रकम और इतनी बड़ी संख्या में वाहनों की जब्ती के बाद गहाणेगाटा का यह कथित ताश क्लब पूरे कोरची तहसील में चर्चा का केंद्र बन गया है।
ताश क्लब के ‘हेडमास्टरों’ के नाम भी चर्चा में
गहाणेगाटा की पुलिस कार्रवाई के बाद ताश क्लब से जुड़े जिन नामों की चर्चा सामने आई, उनमें छत्रपती बांगरे, अमजदखाँ पठान, तालीब, राजा ब्रांड उर्फ राजा श्रीवास और हेमंत राजपूत के नाम शामिल हैं।
मसेली से लेकर बोरी और फिर गहाणेगाटा तक ताश क्लबों को लेकर सामने आए घटनाक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर इन लोगों को ताश क्लब के ‘हेडमास्टर’ कहकर चर्चा की जा रही है। अब गहाणेगाटा की कार्रवाई के बाद पुलिस की नजर सिर्फ मौके पर पकड़े गए लोगों तक रहती है या फिर कथित क्लब संचालन की पूरी कड़ी तक पहुंचती है, इस पर सबकी नजर है।
नांगपुर के बाद गहाणेगाटा—लगातार बड़ी कार्रवाई
गहाणेगाटा की कार्रवाई से पहले कोटगुल पुलिस थाना क्षेत्र के नांगपुर जंगल में भी कथित ताश क्लब पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की थी। वहां भी बड़ी संख्या में लोगों को पकड़े जाने और करीब डेढ़ करोड़ रुपये का मुद्देमाल जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
अब गहाणेगाटा में 1.34 करोड़ रुपये से अधिक की जब्ती ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर गडचिरोली के जंगलों में ताश के कथित क्लबों का यह खेल कितना बड़ा है?
मसेली से गहाणेगाटा तक बदलते रहे ठिकाने, लेकिन नहीं बदला खेल
मसेली का कोल्हाटोला, बोटेकसा, बोरी और फिर गहाणेगाटा—इन नामों को जोड़कर देखें तो ताश क्लबों को लेकर एक लंबी कड़ी सामने आती है।
पहले बड़े पैसों की बाजी की चर्चाएं, फिर क्लब संचालकों के बीच विवाद, निर्मल टी पॉइंट की कथित बैठक, हाथापाई और पिस्टल तानने की चर्चा, पुलिस की सख्ती के बाद क्लब बंद होना, फिर समझौते के बाद 28 लोगों की टीम बनना, पैसों के हिसाब को लेकर तीन गुटों में बंटना और आखिरकार गहाणेगाटा जंगल में पुलिस की रेड। इस पूरी कड़ी का सबसे बड़ा पड़ाव अब गहाणेगाटा की कार्रवाई है।
अब असली सवाल—क्या यहीं खत्म होगा ताश क्लब का खेल?
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या गहाणेगाटा की रेड के बाद जंगल में चलने वाले कथित ताश क्लबों का खेल पूरी तरह बंद होगा? क्योंकि स्थानीय स्तर पर पहले भी क्लब बंद होने और कुछ समय बाद नए ठिकाने पर दोबारा शुरू होने की चर्चाएं सामने आती रही हैं।
ऐसे में अब लोगों की निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या मसेली, कोल्हाटोला, बोटेकसा और बोरी के पुराने ठिकानों की भी जांच होगी? क्या जंगलों में कथित तौर पर क्लब चलाने वाले लोगों तक पुलिस पहुंचेगी? क्या पैसों के लेन-देन की पूरी कड़ी सामने आएगी?
गहाणेगाटा में पुलिस ने 31 लोगों को हिरासत में लेकर और 1 करोड़ 34 लाख रुपये से अधिक का मुद्देमाल जब्त कर यह जरूर दिखा दिया है कि जंगल की आड़ में चल रहे इस कथित ताश के खेल पर अब पुलिस की नजर पहुंच चुकी है।
अब देखना यह है कि गहाणेगाटा की यह रेड सिर्फ एक कार्रवाई बनकर रह जाती है या फिर मसेली से लेकर बोरी और गहाणेगाटा तक फैली ताश क्लबों की पूरी कड़ी पर पुलिस का शिकंजा कसता है।
ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज़..