पेटी में देशी दारू बेचने से लेकर तिन बार तक का सफर! विष्णु तख्तानी के 30 साल के शराब कारोबार की पड़ताल

पुराडा से कढोली और कुरखेड़ा तहसील से गोंदिया के केशोरी तक चर्चा में कारोबार; प्रिया बार, कांता बार और हरदौली के महामाया बार एंड रेस्टोरेंट का नाम सामने, कथित शराब तस्करी पर स्थानीय पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में

गढचिरौली,ब्यूरो : गढचिरौली जिले की कुरखेड़ा तहसील में शराब के कथित अवैध कारोबार और तस्करी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, विष्णु तख्तानी का नाम करीब 30 साल पहले पुराडा में देशी शराब की पेटियों की बिक्री से जुड़े कारोबार के सिलसिले में सामने आया था। आरोप है कि समय के साथ यह कारोबार कढोली और कुरखेड़ा तहसील के अन्य इलाकों तक फैलता गया। अब गोंदिया जिले के केशोरी शहर में प्रिया बार, कांता बार के साथ चंद्रपुर जिले की ब्रह्मपुरी तहसील के हरदौली गांव स्थित महामाया बार एंड रेस्टोरेंट का नाम भी उनके कारोबारी विस्तार के संदर्भ में बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि देशी शराब की पेटी से शुरू हुआ यह सफर कई बार तक कैसे पहुंचा और कुरखेड़ा तहसील में कथित शराब तस्करी पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग पा रही है?

पुराडा से कढोली तक, फिर बार कारोबार का विस्तार

स्थानीय जानकारी के अनुसार, करीब तीन दशक पहले पुराडा में देशी शराब की चिल्लर बिक्री से शुरू हुआ कारोबार आगे कढोली और कुरखेड़ा तहसील के अन्य हिस्सों तक पहुंचा। अब तख्तानी से जुड़े बताए जा रहे कई बार के नाम सामने आ रहे हैं। गोंदिया जिले के केशोरी में प्रिया बार, कांता बार और चंद्रपुर जिले के हरदौली गाँव स्थित महामाया बार एंड रेस्टोरेंट का उल्लेख किया जा रहा है।

यहां सवाल केवल बार की संख्या का नहीं, बल्कि कुरखेड़ा तहसील में लंबे समय से सामने आ रही कथित अवैध शराब बिक्री और परिवहन की शिकायतों का है। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि चारपहिया वाहनों, पिकअप और ट्रकों के जरिए शराब का परिवहन किया जाता रहा है और शराब तस्करी से जुड़े मामलों में वाहन पकड़े जाने की घटनाएं भी हुई हैं। यदि ऐसा है, तो इस पूरे कारोबार की आपूर्ति व्यवस्था पर प्रभावी कार्रवाई होना जरूरी है।

कुरखेड़ा शहर ही नहीं, पूरी तहसील में शराब की कथित तस्करी का सवाल

शराब की कथित अवैध बिक्री का मुद्दा केवल कुरखेड़ा शहर तक सीमित नहीं है। स्थानीय स्तर पर कढोली, पुराडा और तहसील के दूसरे ग्रामीण इलाकों में भी शराब की उपलब्धता को लेकर शिकायतें सामने आने की बात कही जाती है। आरोप है कि शराब की आपूर्ति अलग-अलग मार्गों से होती है और वाहन पकड़े जाने की घटनाओं के बावजूद इस कारोबार पर स्थायी रोक नहीं लग पा रही है।

कुरखेड़ा शहर में शराबबंदी की मांग को लेकर महिलाओं के आगे आने और आंदोलन करने की जानकारी भी सामने आई है। बताया जाता है कि कुछ समय तक स्थिति में बदलाव दिखाई दिया, लेकिन बाद में शराब की उपलब्धता फिर शुरू होने की शिकायतें सामने आईं। यदि तहसील में अवैध शराब बिक्री और परिवहन की समस्या बनी हुई है, तो इसका सीधा सवाल स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग की निगरानी पर उठता है।

केशोरी के दो बार और कुरखेड़ा की ओर शराब परिवहन के आरोप

गोंदिया जिले के केशोरी शहर में प्रिया बार, कांता बार के नाम सामने आए हैं। स्थानीय जानकारी के अनुसार, इन प्रतिष्ठानों को विष्णु तख्तानी के कारोबारी विस्तार से जोड़ा जा रहा है। साथ ही केशोरी से कुरखेड़ा की ओर शराब लाए जाने और परिवहन के दौरान वाहनों के पकड़े जाने की जानकारी भी दी गई है।

यदि केशोरी से कुरखेड़ा तहसील की ओर शराब का अवैध परिवहन होता है, तो इस मार्ग पर निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित पुलिस थानों तथा आबकारी विभाग की है। शराब की आपूर्ति कहां से होती है और ग्रामीण इलाकों तक वह कैसे पहुंचती है, इसकी जांच जरूरी है। हालांकि, केवल बार का नाम सामने आने से किसी प्रतिष्ठान को तस्करी में शामिल नहीं कहा जा सकता। संबंधित प्रतिष्ठानों और कथित परिवहन के बीच संबंध की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से होनी चाहिए।

हरदौली के महामाया बार एंड रेस्टोरेंट का नाम भी चर्चा में

चंद्रपुर जिले की ब्रह्मपुरी तहसील के हरदौली गांव में महामाया बार एंड रेस्टोरेंट हाल के तीन से चार महीनों में शुरू किए जाने की जानकारी मिली है। इस प्रतिष्ठान को भी तख्तानी के कारोबारी विस्तार से जोड़ा जा रहा है। हरदौली और देसाईगंज क्षेत्र के आसपास से गढ़चिरौली जिले की ओर शराब की कथित आवाजाही को लेकर आशंका जताई गई है।

हालांकि, इस बार से अवैध शराब की तस्करी होने का स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस संबंध में निष्कर्ष निकालने के बजाय प्रतिष्ठान के लाइसेंस और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए। यदि शराब के अवैध परिवहन की शिकायतें सामने आती हैं, तो संबंधित जिलों की पुलिस और आबकारी विभाग को समन्वय से कार्रवाई करनी चाहिए।

नकली शराब के आरोप भी गंभीर, लेकिन प्रमाण जरूरी

स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाया गया है कि तख्तानी को पहले शराब तैयार करने, बोतलों की पैकिंग और लेबल लगाने की जानकारी थी। नकली या डुप्लीकेट शराब से कारोबार बढ़ाने संबंधी बातें भी कही जाती हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

यदि नकली या मिलावटी शराब तैयार करने अथवा बेचने की शिकायतें हैं, तो शराब के नमूनों की जांच, बोतलों और लेबल का सत्यापन तथा संबंधित खरीद-बिक्री रिकॉर्ड की पड़ताल की जानी चाहिए। मिलावटी शराब लोगों की जान के लिए खतरा बन सकती है, इसलिए ऐसे आरोपों की गंभीरता से जांच आवश्यक है।

एसपी एम.रमेश के निर्देशों के बावजूद कुरखेड़ा तहसील में कार्रवाई कितनी प्रभावी?

गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक एम. रमेश द्वारा जिले के पुलिस थाना अधिकारियों को अवैध धंधों और गैरकानूनी कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाने की जानकारी है। इसके बावजूद यदि कुरखेड़ा तहसील में शराब की कथित अवैध बिक्री और परिवहन की शिकायतें सामने आती हैं, तो स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

आखिर कुरखेड़ा शहर के साथ ग्रामीण इलाकों में शराब की उपलब्धता की शिकायतों पर कितनी प्रभावी निगरानी हो रही है? कथित तस्करी के मार्गों पर कार्रवाई क्यों जरूरी है? यदि अवैध शराब का कारोबार चल रहा है, तो उसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी है? इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों को अपनी कार्रवाई से देना चाहिए। किसी अधिकारी या व्यक्ति की मिलीभगत का निष्कर्ष बिना प्रमाण नहीं निकाला जा सकता, लेकिन शिकायतों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करना प्रशासन का दायित्व है।

पुराडा से कढोली और कुरखेड़ा तहसील से केशोरी तथा हरदौली तक सामने आई कारोबारी गतिविधियों और कथित शराब परिवहन के आरोपों की निष्पक्ष पड़ताल जरूरी है। मुद्दा किसी व्यक्ति के बार चलाने का नहीं, बल्कि यह है कि यदि कुरखेड़ा तहसील में अवैध शराब की बिक्री और तस्करी हो रही है, तो उस पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग पा रही। स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग को इस सवाल का जवाब कार्रवाई से देना चाहिए, क्योंकि शराब का कथित अवैध कारोबार केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों और समाज को भी प्रभावित कर सकता है।

ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज..

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