“शिक्षा का राष्ट्रीयकरण होना चाहिए” – बाबासाहेब के विचारों का जिक्र

नेपाल मॉडल पर कांग्रेस सांसद नामदेव किरसान का बयान…

नेपाल में शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए गए हालिया कदमों की चर्चा अब भारत की राजनीति में भी होने लगी है। नेपाल में प्रधानमंत्री बालेन शाह द्वारा निजी स्कूल-कॉलेजों को बंद कर सभी बच्चों—चाहे आम जनता हो या मंत्रियों के—को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की नीति पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद नामदेव किरसान ने बड़ा बयान दिया है।

किरसान ने इस मुद्दे पर डॉ.बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि बाबासाहेब की सोच थी कि “शिक्षा का राष्ट्रीयकरण होना चाहिए” और सभी को समान शिक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर शिक्षा पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में होती, तो अमीर-गरीब के बीच शिक्षा का अंतर खत्म हो सकता था।

उन्होंने बताया कि आजादी के बाद जवाहरलाल नेहरू ने IIT, II,IT और अन्य विश्वविद्यालयों जैसी बड़ी संस्थाओं की स्थापना कर शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में काम किया और गांव-गांव तक स्कूल पहुंचाने का प्रयास किया। उस समय शिक्षा का ढांचा मुख्य रूप से सरकारी नियंत्रण में था और निजी संस्थानों को भी सरकारी सहायता मिलती थी, जिससे वहां भी लगभग मुफ्त शिक्षा दी जाती थी।

किरसान ने आरोप लगाया कि बाद के दौर में मिश्र अर्थव्यवस्था के चलते शिक्षा क्षेत्र में निजीकरण बढ़ा और सरकार ने प्राइवेट संस्थानों को आर्थिक सहायता देना कम कर दिया। इसके चलते निजी स्कूलों ने अपनी फीस और व्यवस्था खुद तय करनी शुरू कर दी, जिससे शिक्षा के स्तर और पहुंच में बड़ा अंतर पैदा हो गया।

उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि अमीर वर्ग के बच्चे महंगे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं, जबकि गरीब और किसान परिवारों के बच्चों के पास सरकारी स्कूलों के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इससे शिक्षा के स्तर में असमानता बढ़ रही है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि अगर सभी स्कूल सरकारी होते, तो सरकार को उनके स्तर को बेहतर बनाना ही पड़ता और हर वर्ग के बच्चों को समान गुणवत्ता की शिक्षा मिलती। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़कर भी उच्च शिक्षा हासिल की जा सकती है, बशर्ते सरकार उनका स्तर सुधारने पर ध्यान दे।

नेपाल के फैसले की सराहना करते हुए किरसान ने कहा कि छोटे देश होने के बावजूद वहां की नई और शिक्षित नेतृत्व वाली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है, जो शिक्षा के क्षेत्र में समानता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने दोहराया कि बाबा साहेब अंबेडकर की सोच के अनुसार शिक्षा का राष्ट्रीयकरण होना चाहिए और वह इस विचार से पूरी तरह सहमत हैं।

ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज़..

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