दो पालकमंत्री होने के बावजूद गढ़चिरौली के किसानों के साथ भेदभाव क्यों? महेंद्र ब्राह्मणवाडे

केवल दो तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने पर उठाए सवाल; शेष दस तहसीलों को भी सूची में शामिल कर किसानों को तत्काल राहत देने की मांग

गढ़चिरौली,ब्यूरो : गढ़चिरौली जिले में कम बारिश के कारण किसानों के सामने खेती बचाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कई क्षेत्रों में बारिश की कमी से फसलों की वृद्धि प्रभावित हुई है, वहीं खेतों में खड़ी फसलों को बचाने के लिए किसान लगातार प्रयास कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में जिले की सभी प्रभावित तहसीलों के किसानों को राहत मिलने के बजाय केवल दो तहसीलों को सूखाग्रस्त सूची में शामिल किए जाने पर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस नेता महेंद्र ब्राह्मणवाडे ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को घेरते हुए पूछा है कि जब गढ़चिरौली जिले के पालकमंत्री स्वयं मुख्यमंत्री हैं और सहपालकमंत्री के रूप में आशिष जयस्वाल भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, तो फिर जिले के किसानों को राहत दिलाने में देरी क्यों हो रही है? दो-दो पालकमंत्री होने के बावजूद यदि किसान सूखे के संकट से जूझ रहे हैं, तो इन जिम्मेदारियों का किसानों को क्या लाभ मिल रहा है?

महेंद्र ब्राह्मणवाडे ने कहा कि इस वर्ष कम बारिश के चलते राज्य के अनेक हिस्सों में सूखे जैसी परिस्थितियां बनी हैं। ऐसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्य के विभिन्न जिलों और तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर प्रभावित किसानों को सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। लेकिन गढ़चिरौली जिले में भी बारिश की कमी के कारण कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद जिले की केवल दो तहसीलों को सूखाग्रस्त सूची में शामिल किए जाने से शेष दस तहसीलों के किसानों के सामने राहत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जिले के कई हिस्सों में किसानों को कम बारिश का सामना करना पड़ रहा है, तो बाकी तहसीलों के किसानों को राहत के दायरे से बाहर क्यों रखा जा रहा है?

बारिश की कमी से फसलों पर संकट, किसानों की बढ़ी चिंता

गढ़चिरौली जिले की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है और बड़ी संख्या में परिवार खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में बारिश की कमी का सीधा असर किसानों की आजीविका पर पड़ता है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण कई स्थानों पर फसलों की वृद्धि प्रभावित होने और खड़ी फसलों को बचाने की चुनौती सामने आने की बात महेंद्र ब्राह्मणवाडे ने उठाई है। किसानों को उम्मीद रहती है कि समय पर बारिश होने से उनकी मेहनत सफल होगी और उन्हें फसल से अच्छी आय प्राप्त होगी। लेकिन बारिश की कमी के कारण जब फसलों के उत्पादन पर संकट मंडराने लगता है, तब किसानों की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होने लगती है। बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर खर्च करने के बाद यदि फसल अपेक्षित रूप से नहीं होती, तो किसानों पर आर्थिक दबाव और बढ़ जाता है।

सिंचाई की सुविधा होने के बावजूद बिजली आपूर्ति बनी परेशानी

महेंद्र ब्राह्मणवाडे ने यह मुद्दा भी उठाया कि जिले के कुछ किसानों के पास सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं होने के कारण वे अपनी फसलों को समय पर पानी नहीं दे पा रहे हैं। बारिश की कमी के दौरान सिंचाई की सुविधा किसानों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन सकती है, लेकिन बिजली आपूर्ति बाधित रहने से उसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में किसानों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो जाती है—एक ओर प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा और दूसरी ओर उपलब्ध संसाधनों का पर्याप्त उपयोग नहीं कर पाने की समस्या। यदि समय रहते किसानों को आवश्यक सहायता नहीं मिली, तो उनकी आर्थिक परेशानियां और बढ़ सकती हैं।

शेष दस तहसीलों के किसानों को राहत कब मिलेगी?

महेंद्र ब्राह्मणवाडे ने सरकार की सूखाग्रस्त सूची में शामिल किए जाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों को सहायता देने के मामले में सभी प्रभावित क्षेत्रों की परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि केवल दो तहसीलों को सूची में शामिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शेष दस तहसीलों में भी बारिश की कमी और कृषि पर पड़ने वाले प्रभाव का उचित आकलन किया जाना चाहिए। यदि इन क्षेत्रों में भी किसान सूखे जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, तो उन्हें राहत देने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।

उन्होंने सवाल किया कि जब जिले की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और सहपालकमंत्री आशिष जयस्वाल के पास है, तो जिले के किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल क्यों नहीं किया जा रहा है? किसानों को सरकारी सहायता प्राप्त करने के लिए इंतजार करना पड़े और दूसरी ओर उनकी फसलों पर संकट बना रहे, तो इससे उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

पूरे जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग

महेंद्र ब्राह्मणवाडे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से गढ़चिरौली जिले की सूखे जैसी स्थिति का गंभीरता से संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पूरे जिले की स्थिति का उचित आकलन कर गढ़चिरौली को सूखाग्रस्त जिलों की सूची में शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही, शेष दस तहसीलों को भी सूखाग्रस्त घोषित कर वहां के प्रभावित किसानों को सरकार की ओर से मिलने वाली राहत तत्काल उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों को राहत देने के मामले में किसी भी क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। बारिश की कमी से प्रभावित किसानों को समय पर आर्थिक सहायता और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि वे खेती से जुड़े संकट का सामना कर सकें। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और सहपालकमंत्री आशिष जायसवाल इस मांग पर क्या कदम उठाते हैं और शेष दस तहसीलों के किसानों को राहत दिलाने के लिए सरकार की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है।

ब्यूरो रिपोर्ट सिंदूर न्यूज़..

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